छतरपुर : मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के विरोध में चल रहा आंदोलन बुधवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गया। ‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले चल रही इस भूख हड़ताल में प्रदर्शनकारियों ने परियोजना से प्रभावित लोगों की मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने बताया कि भूख हड़ताल के दौरान अमित भटनागर का वजन करीब 6 किलोग्राम तक कम हो गया है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि चिकित्सा जांच के बाद ही हो सकेगी।
परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के मुद्दे उठाए जा रहे
यह आंदोलन केवल केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि मझगांव, रुंज, नैगुवा और एनटीपीसी प्रोजेक्ट्स से प्रभावित लोगों की मांगों को लेकर भी प्रदर्शन किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं, मुआवजे, पुनर्वास और अन्य अधिकारों को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जय किसान संगठन के कार्यकर्ता लंबे समय से प्रभावित लोगों की मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और अब भूख हड़ताल के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
10 दिन से जारी है भूख हड़ताल
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू हुए 10 दिन हो चुके हैं। इस दौरान आंदोलन स्थल पर समर्थकों और ग्रामीणों की मौजूदगी बनी हुई है।
प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अमित भटनागर के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि भूख हड़ताल में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है।
उनका दावा है कि लगातार उपवास के कारण उनका वजन कम हुआ है और कमजोरी महसूस हो रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रशासन से स्वास्थ्य व्यवस्था और मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को लेकर पहले भी हुआ है विरोध
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य केन और बेतवा नदियों को जोड़कर जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
हालांकि, परियोजना को लेकर कुछ क्षेत्रों में विरोध भी सामने आया है। प्रभावित ग्रामीण और सामाजिक संगठन भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव और पुनर्वास जैसे मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करते रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
आंदोलन कर रहे लोगों की मुख्य मांगों में प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, बेहतर पुनर्वास व्यवस्था और परियोजनाओं से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित लोगों के हितों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सुनकर जल्द समाधान निकाला जाए।
प्रशासन की नजर आंदोलन पर
भूख हड़ताल के बढ़ते समय के साथ प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आंदोलन स्थल पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत और उनकी मांगों को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार है।
विकास और जनहित के बीच संतुलन की चुनौती
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट जैसी बड़ी विकास योजनाएं जहां जल संसाधन और कृषि के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, वहीं इनके कारण प्रभावित होने वाले लोगों के पुनर्वास और अधिकारों का मुद्दा भी अहम रहता है।
छतरपुर में जारी यह आंदोलन इसी संतुलन को लेकर उठ रहे सवालों को सामने ला रहा है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की भूख हड़ताल जारी है और सभी की नजरें प्रशासन व सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।