नीमच। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री **मोहन यादव** ने रविवार को नीमच स्थित **गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य** में एक मादा चीता को छोड़ा। बोत्सवाना से भारत लाई गई इस मादा चीता को मुख्यमंत्री ने अभयारण्य में छोड़ने के बाद उसका नाम **‘राधा’** रखा।यह मादा चीता पहले **कूनो राष्ट्रीय उद्यान** में थी, जहां से उसे गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया। चीता संरक्षण अभियान के तहत मध्य प्रदेश में लगातार चीतों के लिए नए सुरक्षित आवास विकसित किए जा रहे हैं।
बोत्सवाना से लाई गई है मादा चीता
अधिकारियों के अनुसार, इस मादा चीता को **चीता कंजर्वेशन बोत्सवाना (CCB-2)** के रूप में पहचाना जाता था। CCB नाम उसके मूल देश बोत्सवाना और उस वन्यजीव संगठन को दर्शाता है, जिसने भारत लाए जाने से पहले उसके संरक्षण और प्रबंधन में भूमिका निभाई थी।भारत में स्थानांतरण के बाद इस चीते की निगरानी विशेषज्ञों की टीम द्वारा की जा रही थी। अब इसे गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के वातावरण में छोड़ा गया है।
चीता संरक्षण परियोजना को लेकर सीएम ने कही बड़ी बात
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चल रही चीता संरक्षण पहल केवल राज्य तक सीमित परियोजना नहीं है, बल्कि यह एशिया में अपनी तरह का पहला बड़ा प्रयास है।उन्होंने कहा कि चीता संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और राज्य में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में मध्य प्रदेश में शावकों सहित **56 से अधिक चीते** मौजूद हैं।
गांधी सागर अभयारण्य बना नया ठिकाना
गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को चीतों के लिए दूसरे प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चीतों के लिए नए क्षेत्रों का विस्तार करना और उनकी आबादी को सुरक्षित तरीके से बढ़ाना है।कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बाद गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की मौजूदगी भारत के चीता संरक्षण अभियान का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
भारत में चीता संरक्षण की दिशा में कदम
भारत में चीता को फिर से बसाने की योजना के तहत विदेशों से चीतों को लाया गया है। लंबे समय बाद देश में चीते की वापसी को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया।इस परियोजना का उद्देश्य केवल चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण तैयार करना भी है।
विशेषज्ञों की निगरानी में हो रहा संरक्षण
चीता संरक्षण अभियान के तहत विशेषज्ञों की टीम लगातार चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार और गतिविधियों पर नजर रखती है।चीतों को नए वातावरण में ढालने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। उनके भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की जाती है।
वन्यजीव पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की मौजूदगी से क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह क्षेत्र आने वाले समय में आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
मध्य प्रदेश की बढ़ती पहचान
मध्य प्रदेश पहले से ही बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जाना जाता है। अब चीता संरक्षण के कारण राज्य की वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में पहचान और मजबूत हो रही है।राज्य सरकार का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता को सुरक्षित रखना भी प्राथमिकता है।
संरक्षण अभियान में नई उम्मीद
राधा नाम की गई मादा चीता के गांधी सागर अभयारण्य में छोड़े जाने से चीता संरक्षण अभियान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम इस चीते की गतिविधियों पर नजर रखेगी और उसके नए वातावरण में अनुकूलन का अध्ययन करेगी।
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