भोपाल : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव **दत्तात्रेय होसबोले** ने रविवार को भारत की प्रगति और सामाजिक एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत का आगे बढ़ना केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के व्यापक हित में होगा।RSS के शताब्दी वर्ष के समापन की ओर बढ़ने के बीच होसबोले ने संगठन के उद्देश्य, भारत की विकास यात्रा और सामाजिक समरसता को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने समाज में मौजूद विभाजनों को खत्म करने और एक मजबूत, एकजुट समाज बनाने का आह्वान किया।
एकजुट समाज की ताकत पर दिया उदाहरण
अपने संबोधन में दत्तात्रेय होसबोले ने समाज की सामूहिक शक्ति की तुलना मुट्ठी की ताकत से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक साथ जुड़ी हुई उंगलियां मजबूत मुट्ठी बनाती हैं, उसी तरह एकजुट समाज भी बड़ी शक्ति बन सकता है।उन्होंने जाति, संप्रदाय, भाषा और क्षेत्र के आधार पर होने वाले सामाजिक विभाजनों से ऊपर उठने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, समाज की मजबूती के लिए आपसी सहयोग और एकता जरूरी है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का जिक्र
होसबोले ने भारत की आर्थिक, औद्योगिक और कूटनीतिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा नागरिकों में आत्मविश्वास और गर्व की भावना पैदा करती है। उन्होंने भारत की विकास यात्रा को लगातार आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया बताया।
RSS के मिशन को बताया निरंतर यात्रा
RSS के शताब्दी वर्ष को लेकर होसबोले ने कहा कि संगठन की यह महत्वपूर्ण वर्षगांठ एक पड़ाव है, लेकिन इसका उद्देश्य और काम लगातार जारी रहने वाली यात्रा है।उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा से जुड़े प्रयास किसी एक समय सीमा तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
सामाजिक विभाजन खत्म करने की अपील
RSS महासचिव ने समाज में मौजूद विभिन्न प्रकार के मतभेदों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा, क्षेत्र और अन्य आधारों पर होने वाले विभाजन समाज की सामूहिक शक्ति को कमजोर करते हैं।उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर एक मजबूत सामाजिक आधार तैयार करें।
संस्कृति और आधुनिकता के संतुलन पर जोर
होसबोले ने कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक बदलावों को अपनाना होगा।उन्होंने आधुनिक आविष्कारों, तकनीकी विकास और बदलते समय के साथ तालमेल को जरूरी बताया। उनके अनुसार, परंपरा और आधुनिकता का संतुलन भारत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अविनाशी राष्ट्र’ की अवधारणा
अपने संबोधन में होसबोले ने भारत को एक मजबूत और स्थायी राष्ट्र बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आधुनिक सोच को अपनाकर देश को और मजबूत बनाया जा सकता है।उन्होंने समाज में जिम्मेदारी, सहयोग और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को बढ़ाने पर जोर दिया।
विकास के लिए सामाजिक सहयोग जरूरी
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं होती, बल्कि समाज की एकता और नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होती है।एक मजबूत समाज ही विकास के अवसरों का बेहतर उपयोग कर सकता है और चुनौतियों का सामना कर सकता है।
युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
होसबोले ने युवाओं को भी देश के भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को आधुनिक ज्ञान, तकनीक और नवाचार के साथ-साथ देश की संस्कृति और मूल्यों को भी समझना चाहिए।युवा शक्ति देश के विकास में अहम योगदान दे सकती है।
Tags: