ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही सामने आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटा दिया गया है। वहीं, तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह कुल नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाया

ग्वालियर में हुई दुर्घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए झांसी रोड के नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) रवि भदौरिया को पद से हटाने के निर्देश दिए।

हादसे के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और भारी वाहनों को नियंत्रित करने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद सरकार ने पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की।

सीएसपी को हटाने के साथ ही अन्य आठ पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिसकर्मी निलंबित

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिन आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, उनमें विभिन्न थानों और यातायात पुलिस से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।

निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों में झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव, आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा और झांसी रोड के ट्रैफिक थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी शामिल हैं।

इसके अलावा यातायात निरीक्षक राघवेंद्र जादौन, प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी तथा आरक्षक किशन खन्ना, अनिल जैतपुरिया और पवन सेंगर को भी निलंबित किया गया है।

इन सभी पर कार्रवाई श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में संभावित चूक के मद्देनजर की गई है। हालांकि, प्रत्येक अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण विस्तृत जांच के आधार पर होगा।

शीतला माता मंदिर के पास हुआ था दर्दनाक हादसा

जानकारी के अनुसार, ग्वालियर में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात शीतला माता मंदिर के पास यह भीषण सड़क दुर्घटना हुई थी।

नवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान धान से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं की भीड़ में जा घुसा।

ट्रक की चपेट में आने से कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

रविवार को प्रकाशित विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 12 से 14 के बीच बताई गई है, जबकि घायलों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।

प्रतिबंधित मार्ग पर ट्रक पहुंचने से उठे सवाल

दुर्घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वाले मार्ग पर ट्रक कैसे पहुंच गया।

जानकारी के अनुसार, नवरात्रि के दौरान शीतला माता मंदिर की ओर जाने वाले कुछ मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था।

इसके बावजूद धान से लदा ट्रक संबंधित मार्ग पर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि ट्रक ने रास्ते में मौजूद बैरिकेडिंग को भी टक्कर मारी।

इस घटना ने यातायात नियंत्रण, सुरक्षा जांच और प्रतिबंधित मार्गों पर पुलिस की तैनाती को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ट्रक के प्रवेश को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।

मुख्यमंत्री बोले- सुरक्षा में लापरवाही स्वीकार नहीं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे को अत्यंत दुखद बताते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाए।

इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन तथा यातायात नियंत्रण के प्रति विशेष सतर्कता बरतने का संदेश दिया है।

मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की है।

राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को चार लाख रुपये दिए जाएंगे। गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को दो लाख रुपये और अन्य घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई है।

इसके साथ ही सभी घायलों का निःशुल्क उपचार कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

दो मंत्रियों को ग्वालियर भेजा गया

हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने मंत्री ऐदल सिंह कंसाना और राकेश शुक्ला को ग्वालियर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए थे।

मंत्रियों को घायलों के उपचार, राहत व्यवस्था और प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सहायता की निगरानी करने को कहा गया।

सरकार ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि घायल श्रद्धालुओं के इलाज में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।

दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के साथ प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था की होगी जांच

ग्वालियर हादसे के बाद पुलिस अधिकारियों पर हुई कार्रवाई को प्रारंभिक प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

विस्तृत जांच में यातायात प्रतिबंधों के पालन, पुलिस चेकपोस्ट की व्यवस्था, बैरिकेडिंग और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।

इसके अलावा ट्रक के अनियंत्रित होने की वास्तविक वजह और वाहन की तकनीकी स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही दुर्घटना के लिए व्यक्तिगत और संस्थागत जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

हादसे के बाद प्रशासन में हलचल

मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीएसपी को हटाने और आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई के बाद ग्वालियर पुलिस प्रशासन में हलचल है।

सरकार ने यह संदेश दिया है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता से करना होगा।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है। इस दुर्घटना ने भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर यातायात प्रबंधन और सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाने की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है।

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