Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मॉनसून के आगमन से पहले मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति सामान्य से काफी कमजोर बनी हुई है। मौसम विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1 जून से 18 जून के बीच औसतन 28.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि का सामान्य औसत 46.8 मिमी होता है। इस तरह राज्य में लगभग 39 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
बारिश की यह कमी पूरे राज्य में समान रूप से नहीं है। कुछ जिलों में जहां बारिश बेहद कम हुई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इस असमानता ने मौसम के पैटर्न को और अधिक जटिल बना दिया है।
राज्य के कुल 52 जिलों में से 22 जिलों में इस अवधि के दौरान सामान्य से 50 प्रतिशत या उससे भी कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे चिंताजनक स्थिति अलीराजपुर जिले की है, जहां 1 जून से 18 जून के बीच बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है। लगातार शुष्क मौसम के कारण वहां कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इसके विपरीत, कुछ जिलों में प्री-मॉनसून गतिविधियों के कारण सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। राजधानी भोपाल में 52 मिमी के सामान्य औसत के मुकाबले 100.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो लगभग 94 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह श्योपुर जिले में 128 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जबकि नीमच में 87 प्रतिशत और गुना में 62 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की असमान बारिश प्री-मॉनसून सिस्टम और स्थानीय मौसमीय गतिविधियों के कारण होती है। कहीं-कहीं बादल सक्रिय होने से तेज बारिश होती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखा जैसा हाल बना रहता है। इस वजह से राज्य में बारिश का वितरण समान नहीं रह पाता।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जून के महीने में बारिश की कमी या असमानता खरीफ फसलों की तैयारी पर असर डाल सकती है। किसान अभी धान और अन्य फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में बारिश का सही समय पर न होना चिंता का कारण बन सकता है।
राज्य में जल संसाधन विभाग और मौसम एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद की जा रही है कि मॉनसून के सक्रिय होने के बाद बारिश का वितरण सामान्य हो जाएगा और कमी की भरपाई हो सकेगी। हालांकि, फिलहाल राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात और कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश ने मौसम के असंतुलन को उजागर कर दिया है।
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में मॉनसून की प्रगति के साथ बारिश की स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन तब तक किसानों और प्रशासन दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।