शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री के 'जन विश्वास अभियान' कार्यक्रम में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) पर मुर्गी व्यापारी की पिकअप रोककर जबरन चार मुर्गियां लेने और विरोध करने वाले कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज तथा बदसलूकी करने का आरोप लगा है। मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद एएसआई दीपक सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस विभाग ने आरोपों की विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं।
यह मामला जिले के जयसिंहनगर विकासखंड के बनसुकली क्षेत्र का है। यहां मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसी दौरान सहायक उपनिरीक्षक दीपक सिंह परिहार को भी सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।आरोप है कि एएसआई अपनी निर्धारित ड्यूटी छोड़कर सादी वर्दी में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। वहां उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। इसी बीच मुर्गियों से भरी एक पिकअप को रोककर चार मुर्गियां जबरन लेने का आरोप भी सामने आया।
पिकअप रोककर चार मुर्गियां लेने का आरोप
जानकारी के अनुसार, अमडीह गांव निवासी मुर्गी व्यापारी तौकीद रजा ने शहडोल के पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल को लिखित शिकायत दी थी।व्यापारी का आरोप है कि उसके कर्मचारी पिकअप वाहन में मुर्गियां लेकर जा रहे थे। इसी दौरान पहाड़िया के पास एएसआई दीपक सिंह परिहार ने वाहन को रोक लिया।शिकायत के मुताबिक, एएसआई ने कर्मचारियों से मुर्गियां देने की मांग की। कर्मचारियों ने जब इसका विरोध किया, तो उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई और धमकाया गया।व्यापारी ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी ने जबरन चार मुर्गियां ले लीं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, एएसआई ने दस मुर्गियों की मांग भी की थी।कर्मचारियों ने इसकी जानकारी अपने मालिक को दी, जिसके बाद व्यापारी ने पुलिसकर्मी से संपर्क किया।
शिकायत करने पर भी धमकाने का आरोप
मुर्गी व्यापारी तौकीद रजा के मुताबिक, कर्मचारियों से घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने एएसआई दीपक सिंह परिहार को फोन किया।व्यापारी का आरोप है कि जब उन्होंने मुर्गियां जबरन लेने पर आपत्ति जताई, तो एएसआई ने उनके साथ भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।इतना ही नहीं, पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर उन्हें जहां चाहें शिकायत करने की चुनौती दी।इस घटना के बाद व्यापारी ने पूरे मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक को सौंप दी।व्यापारी ने मांग की कि सरकारी पद का दुरुपयोग करने और कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए।
ग्रामीणों के साथ मारपीट का भी आरोप
मुर्गियां लेने के आरोप के अलावा एएसआई दीपक सिंह परिहार पर स्थानीय ग्रामीणों के साथ बदसलूकी और मारपीट करने के आरोप भी लगे हैं।बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने पर आसपास मौजूद ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। इस दौरान पुलिसकर्मी और स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी हुई।कुछ लोगों ने घटना के वीडियो भी अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किए।स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि घटना के समय एएसआई शराब के नशे में थे। हालांकि, इसकी आधिकारिक चिकित्सकीय पुष्टि का विवरण उपलब्ध नहीं है।ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिसकर्मी ने वर्दी की जिम्मेदारी निभाने के बजाय लोगों को डराने-धमकाने का प्रयास किया।इस दौरान हुई घटनाओं को लेकर अलग-अलग शिकायतें सामने आई हैं। इन सभी आरोपों की सत्यता विभागीय जांच में स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में लगी थी ड्यूटी
एएसआई दीपक सिंह परिहार की ड्यूटी मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत बनसुकली में आयोजित कार्यक्रम में लगाई गई थी।यह अभियान आम लोगों की समस्याओं का समाधान करने और प्रशासनिक सेवाओं को जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।ऐसे कार्यक्रमों में पुलिस की जिम्मेदारी सुरक्षा बनाए रखना और नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देना है।लेकिन इसी कार्यक्रम की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी पर आम लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप सामने आने से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।बताया जा रहा है कि एएसआई सीधी थाना क्षेत्र में पदस्थ थे और विशेष ड्यूटी के लिए बनसुकली भेजे गए थे।
एसपी संजय कुमार अग्रवाल ने की कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलने के बाद शहडोल के पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल ने इसे गंभीरता से लिया।पुलिस अधीक्षक के अनुसार, संबंधित एएसआई की ड्यूटी जन विश्वास अभियान के कार्यक्रम में लगाई गई थी, लेकिन वह सादी वर्दी में लोगों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे।उनके खिलाफ मुर्गियां जबरन लेने की शिकायत भी प्राप्त हुई थी।एसपी ने बताया कि शिकायतों को देखते हुए एएसआई दीपक सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं।इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है।जांच में शिकायतकर्ता के आरोपों, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयानों और उपलब्ध वीडियो का महत्व हो सकता है।
पहले भी विवादों में रहने का दावा
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एएसआई दीपक सिंह परिहार का नाम पहले भी अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है।एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह उनके खिलाफ तीसरी निलंबन कार्रवाई है। हालांकि, पूर्व की सभी कार्रवाइयों का आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।यदि विभागीय जांच में वर्तमान शिकायत के आरोप सही पाए जाते हैं, तो पुलिस विभाग नियमानुसार आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।फिलहाल निलंबन को आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस की छवि पर उठे सवाल
इस घटना ने पुलिस की जवाबदेही और आम नागरिकों के प्रति उसके व्यवहार को लेकर चर्चा छेड़ दी है।पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाती है।ऐसे में यदि किसी पुलिसकर्मी पर अपने पद का इस्तेमाल कर व्यापारियों या ग्रामीणों से जबरन सामान लेने का आरोप लगता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।विशेष रूप से उस समय, जब संबंधित कर्मचारी को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया हो।इस मामले में स्थानीय लोगों की शिकायत सीधे पुलिस अधीक्षक तक पहुंचना और उसके बाद निलंबन की कार्रवाई होना महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
विभागीय जांच के नतीजों पर नजर
शहडोल पुलिस ने एएसआई दीपक सिंह परिहार को निलंबित कर यह संकेत दिया है कि कर्मचारियों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है।हालांकि, मुर्गियां जबरन लेने, धमकी देने और ग्रामीणों से मारपीट करने के आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।अब यह देखना होगा कि विभागीय जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आरोपों की पुष्टि होने पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।इस बीच घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जनता का विश्वास जीतने के लिए चलाए जा रहे अभियान में तैनात कर्मचारियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए।
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