Madhya Pradesh मध्य प्रदेश: ग्वालियर जिले में साहारिया आदिवासी परिवारों ने स्थानीय दबंगों पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्जा जमाया हुआ था, लेकिन जब उन्होंने उस जमीन को खाली करने से इनकार किया, तो दबंगों ने उनके झोपड़ियों को आग के हवाले कर दिया और उन्हें धमकाया। पीड़ितों का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने भितरवार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगातार उपेक्षा और सुरक्षा की कमी से निराश होकर पीड़ित परिवारों ने सीधे ग्वालियर एसपी कार्यालय का रुख किया और न्याय की मांग की।
आदिवासी परिवारों का आरोप है कि दबंगों ने न केवल उनकी झोपड़ियों को जलाया बल्कि परिवारों को मारपीट और नुकसान की धमकियां भी दीं। इस हिंसा के चलते परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया और उन्हें रात में भी डर के साए में रहना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा और तत्काल न्याय की मांग की जा रही है। साहारिया आदिवासी समुदाय लंबे समय से इस जमीन पर रहते आए हैं। उनके लिए यह भूमि जीवनयापन का एकमात्र साधन है, और इसे खोने का खतरा उनके लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है। वहीं, प्रशासन की उदासीनता के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है।
एसपी कार्यालय में पहुंचकर पीड़ितों ने पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर जल्द न्याय और सुरक्षा नहीं मिली, तो वे उच्च अधिकारियों और मानवाधिकार संगठनों के पास भी शिकायत करेंगे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मामला आदिवासी अधिकारों और जमीन के संघर्ष का प्रतीक बन गया है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जल्द से जल्द मामला सुलझाया जाए और समुदाय को सुरक्षित रहने का अधिकार दिया जाए।
इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन ग्वालियर पुलिस ने जांच शुरू करने की जानकारी दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों को उचित सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। यह मामला राज्य में आदिवासी अधिकारों और भूमि विवाद को लेकर चिंता का विषय बन गया है। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी इस घटना की निंदा की है और पीड़ितों के लिए न्याय की गुहार लगाई है।