भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाले खतरनाक कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। शहर के सभी 85 वार्डों से पटाखों के अवशेषों को अलग-अलग एकत्रित किया जाएगा और वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए धार जिले के पीथमपुर स्थित अधिकृत अपशिष्ट निपटान केंद्र भेजा जाएगा। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने भोपाल नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर यह योजना बनाई है। इसका मुख्य उद्देश्य दिवाली के दौरान और उसके बाद होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना तथा नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह पहल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की 13 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद शुरू की गई है। ट्रिब्यूनल ने पटाखों के उपयोग और त्योहारों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों, राज्य सरकार के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को 18 नवंबर तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

दिवाली पर निकलता है एक हजार किलो से अधिक पटाखों का कचरा

भोपाल में दिवाली के दौरान बड़ी मात्रा में पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद शहर की सड़कों, गलियों, मैदानों और आवासीय क्षेत्रों में पटाखों के जले-अधजले अवशेष जमा हो जाते हैं।

अनुमान के मुताबिक राजधानी में दिवाली के दौरान औसतन एक हजार किलोग्राम से अधिक पटाखों का कचरा निकलता है। इस कचरे में कागज, प्लास्टिक, रासायनिक पदार्थ और अन्य सामग्री शामिल हो सकती है।

यदि इस कचरे का उचित तरीके से निपटान नहीं किया जाए, तो यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

इसी खतरे को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस वर्ष पटाखों के कचरे को सामान्य घरेलू कचरे से अलग रखने और सुरक्षित निपटान की योजना बनाई है।

सभी 85 वार्डों में अलग से होगा कचरा संग्रहण

भोपाल नगर निगम शहर के सभी 85 वार्डों में विशेष कचरा संग्रहण व्यवस्था लागू करेगा। इसके तहत घरों और अन्य स्थानों से निकलने वाले पटाखों के अवशेषों को सामान्य गीले और सूखे कचरे के साथ नहीं मिलाया जाएगा।

नगर निगम के कचरा संग्रहण वाहनों में पटाखों के अवशेष रखने के लिए अलग लाल रंग के बैग या विशेष कंपार्टमेंट की व्यवस्था की जाएगी।

इससे खतरनाक सामग्री को अन्य कचरे से अलग रखने में मदद मिलेगी। साथ ही संग्रहण और परिवहन के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सकेगी।

नगर निगम की टीमें नागरिकों को भी जागरूक करेंगी कि वे पटाखों के जले और अधजले अवशेषों को घरेलू कचरे में न मिलाएं।

तीन चरणों में पूरा होगा कचरे का निपटान

प्रशासन ने पटाखों के कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए तीन चरणों वाली व्यवस्था तैयार की है।

पहले चरण में नगर निगम के कर्मचारी शहर के सभी वार्डों से पटाखों के अवशेषों को अलग एकत्रित करेंगे।

दूसरे चरण में एकत्रित सामग्री को निर्धारित कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर सामान्य कचरे से अलग सुरक्षित रखा जाएगा।

तीसरे चरण में इस सामग्री को विशेष ढके हुए कंटेनरों में भरकर अधिकृत अपशिष्ट प्रबंधन एजेंसी के माध्यम से पीथमपुर भेजा जाएगा।

पीथमपुर स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी में कचरे की प्रकृति के अनुसार उसका वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा। इसमें अधिक तापमान पर नियंत्रित दहन या अधिकृत खतरनाक अपशिष्ट लैंडफिल में सुरक्षित निपटान जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।

पीथमपुर में खतरनाक अपशिष्ट के उपचार और निपटान के लिए अधिकृत सुविधा पहले से संचालित है।

अधजले पटाखों से आग लगने का खतरा

पटाखों के अवशेषों को सामान्य कचरे के साथ मिलाने से कई तरह के खतरे पैदा हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों के अवशेष मिट्टी और पानी को प्रदूषित कर सकते हैं।

इसके अलावा अधजले पटाखों में विस्फोटक सामग्री बची रहने की संभावना होती है। ऐसी सामग्री को सामान्य कचरे के साथ डालने से संग्रहण वाहनों और कचरा डंपिंग स्थलों पर आग लगने का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पटाखों के अवशेषों को खुले में न जलाया जाए और सामान्य नगरीय कचरे के साथ न मिलाया जाए।

कचरे को संभालने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगी।

प्रदूषण रोकने के लिए सड़कों पर होगा पानी का छिड़काव

दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए भोपाल नगर निगम ने शहर के प्रमुख मार्गों और व्यस्त चौराहों पर पानी का छिड़काव करने की भी योजना बनाई है।

इसके लिए स्मॉग गन और पानी का छिड़काव करने वाली मशीनों का उपयोग किया जाएगा।

शहर के प्रमुख फव्वारों को भी लगातार संचालित रखने की योजना है, ताकि आसपास की हवा में मौजूद धूल के कणों को नीचे बैठाने में मदद मिल सके।

हालांकि, पानी का छिड़काव मुख्य रूप से धूल के नियंत्रण में सहायक होता है। इससे पटाखों से निकलने वाली सभी हानिकारक गैसों और सूक्ष्म प्रदूषकों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए पटाखों के इस्तेमाल संबंधी नियमों का पालन भी आवश्यक है।

घर-घर जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक

नगर निगम की टीमें विशेष जागरूकता अभियान भी चलाएंगी। इसके तहत नागरिकों को पटाखों के कचरे को अलग रखने और सुरक्षित तरीके से नगर निगम को सौंपने के बारे में जानकारी दी जाएगी।

लोगों को समझाया जाएगा कि पटाखों के अवशेषों को घरेलू गीले या सूखे कचरे में नहीं मिलाना चाहिए।

अधजले पटाखों को स्वयं खोलने, जलाने या उनके रसायनों को निकालने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए।

नगर निगम का उद्देश्य लोगों की भागीदारी से कचरा संग्रहण व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।

अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

भोपाल नगर निगम के अपर आयुक्त अमन मिश्रा के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन के लिए मुख्य अभियंता संतोष गुप्ता को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।

नगर निगम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करेगा।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कचरा संग्रहण से लेकर परिवहन और अंतिम निपटान तक पूरी प्रक्रिया निर्धारित पर्यावरणीय नियमों के अनुसार पूरी की जाए।

18 नवंबर तक NGT को देना होगा जवाब

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित नियमों के अनुपालन को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है।

संबंधित विभागों को 18 नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसमें प्रदूषण नियंत्रण और नियमों के पालन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी जानी है।

इससे पहले अधिकारियों को दिवाली के दौरान कचरा संग्रहण और निपटान की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू करनी होगी।

प्रशासन की इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि योजना सही तरीके से लागू होती है, तो पटाखों के खतरनाक अवशेषों से होने वाले मिट्टी और जल प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल भोपाल नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्राथमिकता दिवाली के दौरान निकलने वाले पटाखों के कचरे को सुरक्षित ढंग से एकत्रित कर उसका वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करना है।

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