दूसरी मंजिल से अचानक नीचे गिरी 40 साल पुरानी लिफ्ट, पंजाब से आए 6 मेहमानों समेत 7 घायल
इंदौर। शहर के नवलखा इलाके स्थित स्नेह नगर रिहायशी कॉम्प्लेक्स में मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां करीब 40 साल पुरानी एक लिफ्ट दूसरी मंजिल से अचानक नीचे गिर गई। हादसे के समय लिफ्ट में सात लोग सवार थे। इनमें पंजाब से आए छह मेहमान भी शामिल थे। घटना में सभी सात लोग घायल हो गए। हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी पुरानी लिफ्ट के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी और समय-समय पर उसकी तकनीकी जांच कराई जा रही थी या नहीं।
घटना की जानकारी मिलने के बाद इंदौर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस लिफ्ट के रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड, उसकी तकनीकी स्थिति और निर्धारित क्षमता की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि लिफ्ट किस तकनीकी खराबी के कारण नीचे गिरी। जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है या नहीं, यह भी तकनीकी रिपोर्ट और दस्तावेजों की जांच के बाद स्पष्ट होगा।
पंजाब से आए थे छह मेहमान
जानकारी के अनुसार पंजाब से छह लोग स्नेह नगर रिहायशी कॉम्प्लेक्स में रहने वाले मनोज ढींगरा और उनके परिवार से मिलने आए थे। मुलाकात के बाद सभी नीचे जाने के लिए दूसरी मंजिल पर स्थित लिफ्ट में सवार हुए।
इन छह मेहमानों के साथ एक अन्य व्यक्ति भी लिफ्ट में मौजूद था। इस तरह लिफ्ट में कुल सात लोग सवार थे।
लिफ्ट दूसरी मंजिल से नीचे जाने लगी, लेकिन इसी दौरान अचानक उसमें खराबी आई और वह सातों लोगों को लेकर सीधे ग्राउंड फ्लोर पर जा गिरी।
अचानक हुए इस हादसे से कॉम्प्लेक्स में अफरा-तफरी मच गई।
हादसे में सात लोग घायल
लिफ्ट के नीचे गिरने के कारण उसमें सवार सभी सात लोगों को चोटें आईं। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने घायलों की मदद की।
हादसे की जानकारी मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच की। पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि लिफ्ट में अचानक ऐसी कौन सी तकनीकी खराबी आई, जिससे उसका नियंत्रण समाप्त हो गया।
घटना के समय लिफ्ट में मौजूद लोगों के बयान भी जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
40 साल पुरानी बताई जा रही लिफ्ट
इस घटना में सबसे ज्यादा चर्चा लिफ्ट की उम्र को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि कॉम्प्लेक्स में लगी लिफ्ट करीब 40 साल पुरानी है।
इतनी पुरानी लिफ्ट होने के कारण इसके रखरखाव और समय-समय पर की गई तकनीकी जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कॉम्प्लेक्स में रहने वाले लोगों ने भी लिफ्ट के रखरखाव को लेकर चिंता जताई है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लिफ्ट का आखिरी मेंटेनेंस कब हुआ था और इसके संचालन के लिए कौन जिम्मेदार था।
मेंटेनेंस रिकॉर्ड की जांच
पुलिस ने लिफ्ट के रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। इसमें यह देखा जाएगा कि नियमित सर्विसिंग कराई जा रही थी या नहीं।
इसके अलावा लिफ्ट में लगे सुरक्षा उपकरणों, ब्रेकिंग सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की स्थिति की भी तकनीकी जांच जरूरी मानी जा रही है।
जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि पहले लिफ्ट में किसी तरह की खराबी की शिकायत सामने आई थी या नहीं। यदि शिकायत की गई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
क्षमता की भी होगी जांच
पुलिस लिफ्ट की निर्धारित क्षमता की जानकारी भी जुटा रही है। हादसे के समय इसमें सात लोग सवार थे।
ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि लिफ्ट को अधिकतम कितने लोगों या कितने वजन के लिए बनाया गया था।
हालांकि केवल सात लोगों के सवार होने को हादसे का कारण नहीं माना जा सकता। वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।
लिफ्ट की क्षमता, उसमें सवार लोगों का अनुमानित वजन और उसकी तकनीकी स्थिति समेत सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया जा रहा है।
रखरखाव की जिम्मेदारी पर सवाल
हादसे के बाद कॉम्प्लेक्स में रहने वाले लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि लिफ्ट के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी।
आमतौर पर रिहायशी इमारतों में लिफ्ट के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित सोसायटी, प्रबंधन समिति या अधिकृत मेंटेनेंस एजेंसी के पास हो सकती है। हालांकि स्नेह नगर कॉम्प्लेक्स के मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी, इसका निर्धारण दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा।
पुलिस यह जांच सकती है कि किसी कंपनी या तकनीकी एजेंसी के साथ लिफ्ट की सर्विसिंग का अनुबंध था या नहीं।
यदि कोई मेंटेनेंस एजेंसी नियुक्त थी तो उसके सर्विस रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे।
पहले से थी खराबी तो बढ़ सकती है जिम्मेदारी
जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि क्या लिफ्ट में पहले से तकनीकी खराबी के संकेत दिखाई दे रहे थे।
यदि कॉम्प्लेक्स के लोगों ने पहले इसकी शिकायत की थी और उसके बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई तो जांच में यह तथ्य महत्वपूर्ण हो सकता है।
वहीं यदि नियमित सर्विसिंग के बावजूद अचानक कोई तकनीकी खराबी हुई तो जांच की दिशा अलग हो सकती है।
फिलहाल अधिकारियों ने किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही तय नहीं की है।
तकनीकी जांच से सामने आएगा कारण
लिफ्ट हादसों के पीछे ब्रेकिंग सिस्टम में खराबी, केबल से जुड़ी समस्या, कंट्रोल सिस्टम की गड़बड़ी या अन्य यांत्रिक कारण हो सकते हैं। हालांकि इस घटना में इनमें से किसी कारण की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
तकनीकी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लिफ्ट दूसरी मंजिल से अचानक नीचे क्यों गिरी।
पुलिस इसी वजह से मेंटेनेंस रिकॉर्ड के साथ लिफ्ट की मौजूदा तकनीकी स्थिति की जांच करा रही है।
हादसे के बाद निवासियों में चिंता
घटना के बाद कॉम्प्लेक्स में रहने वाले लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। करीब चार दशक पुरानी लिफ्ट के अचानक गिरने से उसके नियमित रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
निवासियों के लिए लिफ्ट रोजमर्रा की जरूरत होती है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित लिफ्ट सेवा बेहद महत्वपूर्ण है।
ऐसे में निवासी चाहते हैं कि घटना के वास्तविक कारण का जल्द पता लगाया जाए और भविष्य में ऐसी दुर्घटना रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल इंदौर पुलिस ने किसी की लापरवाही को हादसे का कारण घोषित नहीं किया है। पुलिस का फोकस तकनीकी कारणों और रखरखाव व्यवस्था की जांच पर है।
लिफ्ट की उम्र, सर्विसिंग रिकॉर्ड, निर्धारित क्षमता, सुरक्षा उपकरण और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
नवलखा के स्नेह नगर कॉम्प्लेक्स में हुई इस घटना ने पुरानी इमारतों में लगी लिफ्टों की सुरक्षा और नियमित तकनीकी जांच की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब जांच के बाद ही पता चलेगा कि यह हादसा अचानक आई तकनीकी खराबी का परिणाम था या रखरखाव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी।