ग्वालियर के मदरसे से 22 बच्चे रेस्क्यू, बाल आयोग ने की कार्रवाई
ग्वालियर में मदरसे का निरीक्षण, मान्यता के दस्तावेज नहीं दिखा सका प्रबंधन
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे में बच्चों को रखने और उनकी देखरेख की व्यवस्था को लेकर मिली शिकायत के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कार्रवाई की। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने परिसर का निरीक्षण किया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यहां से 22 बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति की निगरानी में संरक्षण गृहों में भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि मौके पर प्रबंधन आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि मदरसे में बच्चों को रखने के लिए जरूरी मान्यता और व्यवस्थाओं को लेकर कमियां हैं। यह जानकारी राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंचाई गई। इसके बाद आयोग की अध्यक्ष महिला एवं बाल विकास विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। टीम ने मदरसे के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया और वहां रहने वाले बच्चों के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने प्रबंधन से संस्थान के संचालन, मान्यता और बच्चों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा।
निरीक्षण के दौरान बच्चों की नियमित शिक्षा और निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। अधिकारियों के मुताबिक, परिसर में बच्चों के रहने के लिए कमरे बने हुए थे, लेकिन उनकी देखरेख के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। नियमित पढ़ाई और जिम्मेदार कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर भी कमियां बताई गईं। टीम ने इन परिस्थितियों को देखते हुए बच्चों को अपनी निगरानी में लेने का निर्णय किया। कार्रवाई दोपहर से शाम तक चली और इस दौरान प्रबंधन से आवश्यक अभिलेख मांगे जाते रहे।
आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के अनुसार, जांच के दौरान तीन बच्चियां एक कमरे में बंद मिलीं। उनका कहना है कि प्रबंधन ने शुरुआत में इन बच्चियों के वहां होने की जानकारी नहीं दी थी। परिसर की जांच के दौरान अधिकारियों को उनके बारे में पता चला। यह बात भी निरीक्षण में सामने आई कमियों में शामिल की गई है। हालांकि, बच्चियों को कमरे में रखने की परिस्थितियों और प्रबंधन की जिम्मेदारी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र लगभग चार से 16 वर्ष के बीच बताई गई है। बाल कल्याण समिति की निगरानी में उन्हें उम्र के अनुसार अलग-अलग गृहों में रखा गया है। छोटे बच्चों को शिशु गृह और बड़े बच्चों को संबंधित बाल देखरेख संस्थानों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों को परिवारों के सुपुर्द करने से पहले अभिभावकों के दस्तावेज और बच्चों से उनके संबंधों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद ही उन्हें सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
संयुक्त निरीक्षण में बच्चों के रहने की बुनियादी सुविधाओं को भी देखा गया। शौचालयों की स्थिति, बिस्तरों की उपलब्धता और बच्चों के स्कूल में दाखिले से संबंधित सवाल उठाए गए। अधिकारियों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई कि दो बच्चों ने पहले बाल कल्याण समिति के समक्ष कथित शोषण की शिकायत की थी। यह आरोप जांच का विषय है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने या शिकायत में लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित मानने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कार्रवाई के दौरान मदरसा प्रबंधन ने बच्चों को तत्काल वापस छोड़ने की मांग की। प्रबंधन की ओर से कहा गया कि दस्तावेज उपलब्ध कराने में समय लगता है। कुछ अभिभावक भी मौके पर पहुंचे और बच्चों को वहां से हटाए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि रहने, खाने और पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर उन्हें शिकायत नहीं थी। मदरसे के एक शिक्षक ने इमारत निर्माणाधीन होने के कारण कुछ अस्थायी कमियां होने की बात कही और कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया। प्रबंधन और परिजनों की आपत्तियों के बीच अधिकारियों ने बच्चों को संरक्षण में रखने की प्रक्रिया जारी रखी। इस मामले में एक ओर आयोग ने सुरक्षा, शिक्षा और दस्तावेजों से संबंधित कमियां बताई हैं, वहीं प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। जांच में इन दोनों पक्षों के बयानों और संबंधित रिकॉर्ड का महत्व रहेगा। मौके पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है; संस्थान की स्थिति और जवाबदेही पर अंतिम निर्णय संबंधित जांच तथा अभिलेखों के परीक्षण से स्पष्ट होगा।
इससे पहले भी इसी मदरसे में रहने वाले 13 वर्षीय एक बच्चे के लापता होने का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चा 14 अक्टूबर की रात मदरसे में था, लेकिन अगली सुबह वहां नहीं मिला। मामले की शिकायत थाने में की गई थी और बाद में बच्चा मिल गया था। मौजूदा कार्रवाई में बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन की जांच जारी है। बच्चों की संख्या पर भी रिपोर्टों में अंतर है—कई रिपोर्टें 22, जबकि एक अन्य रिपोर्ट 26 बच्चों का उल्लेख करती है। अंतिम आधिकारिक आंकड़े की पुष्टि आवश्यक है।
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