मइयार में 11 साल के श्वेत बाघ टिपू का निधन, प्रारंभिक जांच में बताया गया क्रॉनिक किडनी फेल्योर
Maihar मइयार (मध्य प्रदेश)। महाराजा मार्तंड सिंह जुड़व श्वेत बाघ सफारी और चिड़ियाघर में 11 वर्षीय श्वेत बाघ टिपू का मंगलवार दोपहर निधन हो गया। टिपू की मौत 19 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे उपचार के दौरान हुई। टिपू को 3 सितंबर 2023 को नेशनल जूलॉजिकल पार्क, नई दिल्ली से मुकुंदपुर लाया गया था। पिछले कुछ महीनों से बाघ की सेहत लगातार बिगड़ रही थी। चिड़ियाघर के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता लगातार उनकी निगरानी कर रहे थे। इसके अलावा उपचार में SWFH जबलपुर के डॉ. अमोल रोकेड़े, वेटरनरी कॉलेज रीवा की डॉ. कंचन वालवाडकर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डॉ. राजेश तोमर को भी शामिल किया गया।
चिकित्सकों की टीम ने टिपू का पोस्टमार्टम किया। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण क्रॉनिक किडनी फेल्योर पाया गया। बाघ के अंगों के नमूने विस्तृत जांच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार चिड़ियाघर के नियमों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न किया गया। डॉ. नितिन गुप्ता ने बताया कि टिपू की उम्र 11 साल थी और वह सफारी का प्रमुख आकर्षण था। उसके अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद पूरी टीम लगातार उसकी देखभाल में लगी रही। डॉ. अमोल रोकेड़े और डॉ. कंचन वालवाडकर ने भी बताया कि टिपू की किडनी की हालत पिछले कई महीनों से गंभीर थी, लेकिन सभी प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
चिड़ियाघर प्रशासन ने टिपू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और बताया कि उसकी याद में चिड़ियाघर में विशेष श्रद्धांजलि दी जाएगी। टिपू की मृत्यु ने सफारी और चिड़ियाघर के कर्मचारियों, पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को भी दुखी कर दिया है। महाराजा मार्तंड सिंह जुड़व श्वेत बाघ सफारी और चिड़ियाघर में टिपू की विशेष पहचान थी। उसके श्वेत फर और आकर्षक रूप ने सफारी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। प्रशासन ने कहा कि बाघ की देखभाल और स्वास्थ्य जांच के लिए भविष्य में और भी कड़े उपाय किए जाएंगे, ताकि ऐसे दुर्लभ जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।