मैनागप्पल्ली ओवरपास का काम तेज, जल्द शुरू होगा निर्माण

Update: 2026-07-18 10:24 GMT

केरल : मैनागप्पल्ली रेलवे ओवरपास परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने जानकारी दी है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है। उन्होंने कहा कि शेष औपचारिकताएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी और इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। टेंडर जारी होने के बाद निर्माण से जुड़ी प्रारंभिक तैयारियां शुरू केरल। मैनागप्पल्ली रेलवे ओवरपास परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने जानकारी दी है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है। उन्होंने कहा कि शेष औपचारिकताएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी और इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। टेंडर जारी होने के बाद निर्माण से जुड़ी प्रारंभिक तैयारियां शुरू होंगी, जिनमें पाइल टेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं।

मैनागप्पल्ली रेलवे फ्लाईओवर परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और रेलवे क्रॉसिंग से होने वाली परेशानियों को दूर करना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद स्थानीय लोगों, वाहन चालकों और यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने बताया कि परियोजना को गति देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं और बाकी बचे मुद्दों का समाधान जल्द कर लिया जाएगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जाएंगे।

इस परियोजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार की एजेंसी रोड्स एंड ब्रिजेज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ केरल (RBDCK) द्वारा किया जा रहा है। मैनागप्पल्ली रेलवे फ्लाईओवर की अनुमानित लागत 49.94 करोड़ रुपये है। इस राशि को राज्य सरकार और भारतीय रेलवे 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे।

परियोजना के विस्तृत डिजाइन को पहले ही केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) से मंजूरी मिल चुकी है। डिजाइन को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के निर्माण से जुड़े अगले चरणों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

सांसद ने बताया कि उनके हस्तक्षेप के बाद सदर्न रेलवे के चीफ ब्रिजेज इंजीनियर ने संशोधित जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (GAD) को मंजूरी दी। इस मंजूरी के बाद परियोजना में आ रही कई तकनीकी बाधाएं दूर हुईं और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

हालांकि, परियोजना से जुड़े कुछ तकनीकी मुद्दे अभी भी लंबित हैं। इनमें तीन इमारतों के आंशिक अधिग्रहण से संबंधित मामले शामिल हैं। इन मामलों को जल्द सुलझाने के लिए एक विशेष समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में कुन्नथूर के विधायक, सदर्न रेलवे के अधिकारी, संबंधित विभागों के प्रतिनिधि और RBDCK के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य लंबित मामलों का समाधान निकालना और परियोजना को समय पर आगे बढ़ाना होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मैनागप्पल्ली क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग के कारण अक्सर यातायात बाधित होता है। व्यस्त समय में यहां जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे ओवरपास बनने से इस समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है।

परियोजना के समर्थकों का मानना है कि यह फ्लाईओवर क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का आग्रह किया है।

रेलवे और राज्य सरकार की संयुक्त भागीदारी वाली यह परियोजना क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। भूमि अधिग्रहण पूरा होने और टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है।

अब सभी की निगाहें आगामी समन्वय बैठक और टेंडर प्रक्रिया पर हैं। यदि लंबित तकनीकी मामलों का समाधान जल्द हो जाता है, तो मैनागप्पल्ली रेलवे ओवरपास का निर्माण निर्धारित समय सीमा में शुरू हो सकता है और लंबे समय से चली आ रही स्थानीय लोगों की मांग पूरी हो सकेगी।होंगी, जिनमें पाइल टेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं।

मैनागप्पल्ली रेलवे फ्लाईओवर परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और रेलवे क्रॉसिंग से होने वाली परेशानियों को दूर करना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद स्थानीय लोगों, वाहन चालकों और यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने बताया कि परियोजना को गति देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं और बाकी बचे मुद्दों का समाधान जल्द कर लिया जाएगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जाएंगे।

इस परियोजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार की एजेंसी रोड्स एंड ब्रिजेज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ केरल (RBDCK) द्वारा किया जा रहा है। मैनागप्पल्ली रेलवे फ्लाईओवर की अनुमानित लागत 49.94 करोड़ रुपये है। इस राशि को राज्य सरकार और भारतीय रेलवे 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे।

परियोजना के विस्तृत डिजाइन को पहले ही केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) से मंजूरी मिल चुकी है। डिजाइन को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के निर्माण से जुड़े अगले चरणों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

सांसद ने बताया कि उनके हस्तक्षेप के बाद सदर्न रेलवे के चीफ ब्रिजेज इंजीनियर ने संशोधित जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (GAD) को मंजूरी दी। इस मंजूरी के बाद परियोजना में आ रही कई तकनीकी बाधाएं दूर हुईं और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

हालांकि, परियोजना से जुड़े कुछ तकनीकी मुद्दे अभी भी लंबित हैं। इनमें तीन इमारतों के आंशिक अधिग्रहण से संबंधित मामले शामिल हैं। इन मामलों को जल्द सुलझाने के लिए एक विशेष समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में कुन्नथूर के विधायक, सदर्न रेलवे के अधिकारी, संबंधित विभागों के प्रतिनिधि और RBDCK के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य लंबित मामलों का समाधान निकालना और परियोजना को समय पर आगे बढ़ाना होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मैनागप्पल्ली क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग के कारण अक्सर यातायात बाधित होता है। व्यस्त समय में यहां जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे ओवरपास बनने से इस समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है।

परियोजना के समर्थकों का मानना है कि यह फ्लाईओवर क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का आग्रह किया है।

रेलवे और राज्य सरकार की संयुक्त भागीदारी वाली यह परियोजना क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। भूमि अधिग्रहण पूरा होने और टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है।

अब सभी की निगाहें आगामी समन्वय बैठक और टेंडर प्रक्रिया पर हैं। यदि लंबित तकनीकी मामलों का समाधान जल्द हो जाता है, तो मैनागप्पल्ली रेलवे ओवरपास का निर्माण निर्धारित समय सीमा में शुरू हो सकता है और लंबे समय से चली आ रही स्थानीय लोगों की मांग पूरी हो सकेगी।

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