मुंदूर-थूथा स्टेट हाईवे बना हादसों का केंद्र, दो हफ्तों में कई दुर्घटनाओं से बढ़ी चिंता
Kerala केरल: मुंदूर-थूथा स्टेट हाईवे पर लगातार हो रहे हादसों ने स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील माने जाने वाले इस मार्ग पर अब हादसों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मुंदूर और 16वें मील क्षेत्र के बीच सड़क दुर्घटनाओं के कई मामले सामने आने के बाद लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
यह इलाका कोंगाड और कड़मपाझीपुरम ग्राम पंचायतों की सीमा के अंतर्गत आता है। पिछले दो हफ्तों के दौरान एझाकाड और बंगलो हिल के बीच आधा दर्जन से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लगातार हो रहे हादसों ने इस मार्ग को एक बार फिर दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में सामने ला दिया है।
हाल ही में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में मुंदूर युवा क्षेत्र कॉलेज के छात्र मुहम्मद फरहान की मौत हो गई। बताया गया कि एक लॉरी की चपेट में आने से उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया और स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
इससे पहले मुंदूर निवासी मणिकंदन की भी एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि मणिकंदन देख नहीं सकते थे और एक कार हादसे में उनकी जान चली गई। लगातार हो रही मौतों के कारण स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क के नवीनीकरण के बाद वाहनों की रफ्तार काफी बढ़ गई है। कई चालक सड़क की बेहतर स्थिति का फायदा उठाते हुए तेज गति से वाहन चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा लापरवाही से वाहन चलाना, लंबी दूरी के दौरान नींद या ऊंघ की स्थिति में ड्राइविंग करना और सड़क की भौगोलिक स्थिति की जानकारी न होना भी हादसों के प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
इस मार्ग पर कई खतरनाक मोड़ हैं, जहां सुरक्षा इंतजामों की कमी महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर निगरानी कैमरे और पर्याप्त चेतावनी संकेतक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इसके कारण वाहन चालकों को अचानक आने वाले मोड़ों और जोखिम भरे हिस्सों का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
सड़क सुरक्षा के लिए लगाए गए कुछ बैरिकेड्स भी कई बार हादसों का कारण बन रहे हैं। लोगों का कहना है कि तेज गति से आने वाले वाहन इन बैरिकेड्स से टकरा जाते हैं और कई मामलों में वाहन पलटने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। सुरक्षा उपकरणों की सही स्थिति और उनके स्थान को लेकर भी समीक्षा की जरूरत बताई जा रही है।
स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों ने मांग की है कि दुर्घटना वाले स्थानों की विशेषज्ञों की टीम से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि केवल सड़क निर्माण या मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सड़क की डिजाइन, मोड़, संकेतक, रोशनी और यातायात नियंत्रण व्यवस्था का भी अध्ययन जरूरी है।
लोगों का सुझाव है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में स्पीड लिमिट बोर्ड, अतिरिक्त चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर, स्ट्रीट लाइट और सर्विलांस कैमरे लगाए जाएं। इसके साथ ही नियमित पुलिस निगरानी और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की भी जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सड़क पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल वाहन चालकों की जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं है। सड़क की संरचना, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा सुविधाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। ऐसे में मुंदूर-थूथा स्टेट हाईवे पर दुर्घटना वाले स्थानों की पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से सुधार करना जरूरी है।
लगातार हो रहे हादसों के बीच अब स्थानीय स्तर पर यह मांग तेज हो गई है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराए। लोगों को उम्मीद है कि समय रहते उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।
मुंदूर-थूथा स्टेट हाईवे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, लेकिन बढ़ती दुर्घटनाओं ने इसकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए कितनी तेजी से कदम उठाता है।