तिरुवनंतपुरम। ओणम जैसे बड़े त्योहार के नजदीक आने के बावजूद राज्य के जिला शिक्षा प्रशिक्षण केंद्रों (DETs) में कार्यरत कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी कम नहीं हो पाई है। राज्य के 14 DETs में काम करने वाले करीब 300 कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। लंबे समय से वेतन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के सामने अब रोजमर्रा के खर्चों, कर्ज की किस्तों और इलाज से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार के समय जब परिवारों की आर्थिक जरूरतें बढ़ जाती हैं, ऐसे समय में वेतन नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई कर्मचारियों ने बताया कि घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों का खर्च और बैंक लोन की किस्तें चुकाना भी कठिन हो गया है। नियमित रूप से काम करने के बावजूद समय पर वेतन नहीं मिलना उनके लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है।
जिला शिक्षा प्रशिक्षण केंद्र राज्य की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से शिक्षकों के प्रशिक्षण, शैक्षणिक सुधार और शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाता है। यहां कार्यरत कर्मचारी प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अपनी सेवाएं देते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का लगातार निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन वेतन भुगतान में हो रही देरी से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, राज्य के 14 जिलों में संचालित DETs में करीब 300 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। वेतन जारी नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने अपनी बचत से किसी तरह घर का खर्च चलाया, लेकिन अब स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इस मामले को कई स्तरों पर उठाया है। संबंधित अधिकारियों को जानकारी देने के साथ ही वेतन भुगतान जल्द करने की मांग की गई है। इसके अलावा शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन के संज्ञान में भी यह मामला लाया गया था। हालांकि, इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द लंबित वेतन जारी किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। उनका कहना है कि त्योहार के समय कर्मचारियों को आर्थिक सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। यदि समय पर वेतन नहीं मिला तो कई परिवारों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
ओणम के दौरान आमतौर पर लोग कपड़े, घर की जरूरतों और अन्य सामानों की खरीदारी करते हैं। लेकिन वेतन नहीं मिलने के कारण DET कर्मचारियों के परिवार इस बार त्योहार की तैयारियों को लेकर चिंतित हैं। कई कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने बच्चों और परिवार की छोटी-छोटी खुशियों को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
कर्मचारियों ने सरकार से अपील की है कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। उन्होंने कहा कि लगातार तीन महीने तक वेतन रोकना कर्मचारियों के लिए मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला है। समय पर वेतन मिलना हर कर्मचारी का अधिकार है और सरकार को इस दिशा में जल्द कदम उठाना चाहिए।
वहीं, शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वेतन भुगतान से जुड़े मामलों को जल्द सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, कर्मचारियों को अभी भी राहत का इंतजार है। कर्मचारियों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है।
ओणम जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से पहले वेतन संकट ने DET कर्मचारियों की परेशानियों को उजागर कर दिया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द निर्णय लेकर लंबित वेतन जारी करेगी, ताकि वे भी अपने परिवार के साथ त्योहार की खुशियां मना सकें।