वाहीकडावु। बुधवार शाम वाहीकडावु और आसपास के इलाकों में हुई भारी बारिश और तेज हवाओं ने जमकर तबाही मचाई। तेज हवा के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। वाहीकडावु कृषि भवन पर एक बड़ा पेड़ गिरने से इमारत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर ढह गया। घटना के समय भवन में कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन पेड़ गिरने की आवाज और स्थिति बिगड़ती देख वे तुरंत बाहर निकल गए। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

घटना बुधवार शाम करीब 4:30 बजे की बताई जा रही है। अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू होने के बाद कृषि भवन परिसर में लगा पेड़ तेज हवा का दबाव नहीं झेल सका और भवन की ओर गिर गया। पेड़ के गिरने से इमारत के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा। कर्मचारियों ने तत्काल बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

कृषि भवन का हिस्सा हुआ क्षतिग्रस्त

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज हवा के बीच पेड़ अचानक कृषि भवन की इमारत पर गिर पड़ा। पेड़ का वजन और गिरने की रफ्तार इतनी अधिक थी कि भवन का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर ढह गया। घटना के समय कृषि भवन में काम चल रहा था।

पेड़ गिरने के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारी तुरंत भवन से बाहर निकल आए। इसके बाद आसपास के लोगों को भी घटना की जानकारी मिली। स्थानीय स्तर पर क्षतिग्रस्त भवन और गिरे हुए पेड़ का जायजा लिया गया।

प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से नुकसान का आकलन किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इमारत को हुए नुकसान के कारण आने वाले दिनों में कृषि भवन की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ने की आशंका है।

पूवथिप्पॉयिल में केले की फसल बर्बाद

तेज हवा और बारिश का सबसे ज्यादा असर किसानों की फसलों पर पड़ा है। पूवथिप्पॉयिल इलाके में हवा ने केले की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। अम्योलीक्कल शाली के केले के करीब 150 गुच्छे और थचारक्कुन्नन मुहम्मद के केले के लगभग 200 गुच्छे नष्ट हो गए।

किसानों के लिए यह नुकसान इसलिए भी बड़ा है क्योंकि फसल तैयार होने के समय तेज हवा ने उसे बर्बाद कर दिया। केले की खेती में पौधों की देखभाल, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर किसान काफी खर्च करते हैं। ऐसे में फसल के नष्ट होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है।

स्थानीय किसानों के अनुसार, तेज हवा के कारण केले के पौधे जमीन पर गिर गए और बड़ी संख्या में फल वाले गुच्छे क्षतिग्रस्त हो गए। कई पौधे पूरी तरह टूट गए, जिससे उनके दोबारा फल देने की संभावना भी खत्म हो गई।

काची और दाल की फसलों को भी भारी नुकसान

अम्योलीक्कल इमैनुएल की काची और दाल की फसलें भी तेज हवा की चपेट में आकर बर्बाद हो गईं। इन फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेत के चारों ओर बाड़ लगाई गई थी, लेकिन तेज हवा और पेड़ों के गिरने के कारण पूरी फसल को नुकसान पहुंचा।

जानकारी के अनुसार, खेत में लगे सागौन के पेड़ तेज हवा के कारण उखड़कर खंभों पर जा गिरे। पेड़ों और खंभों के गिरने से काची और दाल की फसलें दब गईं और बड़े क्षेत्र में फसल नष्ट हो गई।

किसानों ने फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए अतिरिक्त खर्च कर बाड़ लगाई थी। इसके बावजूद प्राकृतिक आपदा के सामने उनकी मेहनत और निवेश बर्बाद हो गया।

बैंक से कर्ज लेकर तैयार की थी फसल

प्रभावित किसानों के लिए नुकसान की गंभीरता इसलिए भी अधिक है क्योंकि इन फसलों को तैयार करने के लिए बैंक से ऋण लिया गया था। इसके अलावा खेती के लिए लीज पर जमीन ली गई थी। किसानों ने कर्ज लेकर बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि सामग्री पर पैसा लगाया था।

फसल बर्बाद होने के बाद अब किसानों के सामने कर्ज चुकाने की चुनौती खड़ी हो गई है। फसल से होने वाली आय पर निर्भर किसानों को प्राकृतिक आपदा के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

किसानों का कहना है कि यदि फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है तो बैंक ऋण और लीज की जमीन का खर्च निकालना मुश्किल हो सकता है। इसलिए प्रभावित किसानों ने नुकसान का आकलन कर उचित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

किसानों को मुआवजे की उम्मीद

तेज बारिश और हवाओं के बाद किसानों की नजर अब प्रशासनिक सर्वे और संभावित राहत पर है। प्रभावित किसानों की मांग है कि कृषि विभाग और राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचकर नुकसान का सही आकलन करें। केले, काची और दाल सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कर किसानों को नियमों के तहत राहत उपलब्ध कराई जाए।

किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और सरकारी सहायता मिलने से उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। विशेष रूप से बैंक ऋण लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए फसल नुकसान बड़ी चिंता का कारण बन गया है।

मौसम ने बढ़ाई चिंता

बुधवार की घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में तेज बारिश और हवाओं के दौरान होने वाले नुकसान की चिंता बढ़ा दी है। पेड़ों के गिरने से जहां सार्वजनिक और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है, वहीं खेतों में खड़ी फसलें भी बर्बाद हो सकती हैं।

वाहीकडावु कृषि भवन पर पेड़ गिरने की घटना में कर्मचारियों का समय रहते बाहर निकल जाना राहत की बात रही। यदि घटना के समय कर्मचारी भवन के क्षतिग्रस्त हिस्से में मौजूद रहते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

फिलहाल क्षेत्र में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। कृषि भवन को हुए नुकसान के साथ किसानों की बर्बाद फसलों की जानकारी भी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है। बुधवार की तेज बारिश और हवाओं ने वाहीकडावु में किसानों और प्रशासन दोनों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अब प्रभावित परिवारों और किसानों को प्रशासन से राहत और उचित मुआवजे की उम्मीद है।

Tags: