केरल में अब वृद्धाश्रम कहलाएंगे ‘स्नेहलयम’, सरकारी रिकॉर्ड और साइनबोर्ड पर बदलेगा नाम
तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार ने राज्य में संचालित वृद्धाश्रमों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब राज्य में सरकारी और निजी प्रबंधन के तहत चलने वाले सभी ओल्ड-एज होम यानी वृद्धाश्रमों को ‘स्नेहलयम’ नाम से जाना जाएगा। मलयालम शब्द ‘स्नेहलयम’ का अर्थ ‘प्यार का घर’ है। राज्य सरकार का मानना है कि बुजुर्गों के लिए संचालित इन संस्थानों की पहचान केवल देखभाल करने वाली जगह के रूप में नहीं, बल्कि स्नेह, सम्मान और अपनापन देने वाले घर के रूप में होनी चाहिए।
राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री वी.ई. अब्दुल गफूर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सरकारी और निजी प्रबंधन के तहत संचालित सभी वृद्धाश्रमों के साइनबोर्ड और सरकारी रिकॉर्ड में ‘ओल्ड-एज होम’ नाम का इस्तेमाल नहीं किया जाए। इसके स्थान पर अब इन संस्थानों के लिए ‘स्नेहलयम’ शब्द का प्रयोग किया जाएगा। मंत्री के कार्यालय की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई।
साइनबोर्ड से सरकारी दस्तावेजों तक बदलेगा नाम
मंत्री के निर्देश के अनुसार राज्य में वृद्धाश्रमों के बाहर लगे साइनबोर्ड में भी बदलाव किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों में भी ‘ओल्ड-एज होम’ के स्थान पर ‘स्नेहलयम’ नाम दर्ज किया जाएगा।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति समाज की सोच और भाषा में सकारात्मक बदलाव लाना है। आम तौर पर ‘ओल्ड-एज होम’ शब्द ऐसी जगह की पहचान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जहां बुजुर्ग रहने के लिए आते हैं। सरकार अब इस पहचान को अधिक सम्मानजनक और भावनात्मक स्वरूप देना चाहती है।
‘प्यार का घर’ होगा नई पहचान
‘स्नेहलयम’ नाम अपने आप में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता और अपनापन दर्शाता है। सरकार की ओर से इस नाम को अपनाने के पीछे यही सोच बताई जा रही है कि बुजुर्गों के लिए बनाए गए संस्थानों को महज रहने की जगह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बढ़ती उम्र में बुजुर्गों को भोजन, आवास और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ भावनात्मक सहयोग और सामाजिक जुड़ाव की भी आवश्यकता होती है। ऐसे में ‘प्यार का घर’ अर्थ रखने वाला नाम इन संस्थानों की भूमिका को एक व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है।
सरकारी और निजी दोनों संस्थान होंगे शामिल
यह बदलाव केवल राज्य सरकार द्वारा संचालित वृद्धाश्रमों तक सीमित नहीं रहेगा। निर्देश के दायरे में सरकारी और निजी प्रबंधन के तहत चलने वाले सभी ओल्ड-एज होम शामिल होंगे। यानी अलग-अलग संस्थाओं या संगठनों द्वारा संचालित वृद्धाश्रम भी अपनी पहचान में ‘स्नेहलयम’ शब्द का इस्तेमाल करेंगे।
इससे राज्यभर में बुजुर्गों के लिए संचालित संस्थानों की पहचान एक समान होने की उम्मीद है। सरकारी रिकॉर्ड में भी एक समान नाम इस्तेमाल किए जाने से प्रशासनिक स्तर पर इन संस्थानों को लेकर स्पष्टता आएगी।
बुजुर्गों के सम्मान पर जोर
सरकार की इस पहल को बुजुर्गों के सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन से जोड़कर देखा जा रहा है। उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों को परिवार से अलग रहना पड़ता है या ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहां उन्हें संस्थागत देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में उनके लिए बनाए गए केंद्रों का वातावरण और उनकी पहचान दोनों महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
सरकार का संदेश है कि बुजुर्गों को केवल सहायता पाने वाले व्यक्ति के तौर पर नहीं, बल्कि समाज के अनुभव और ज्ञान के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखा जाना चाहिए। ‘स्नेहलयम’ नाम इसी सोच को सामने लाने की कोशिश है।
भाषा के जरिए बदलने की कोशिश
सरकार की पहल में नाम बदलने के साथ-साथ भाषा के माध्यम से सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव का प्रयास भी दिखाई देता है। किसी संस्था को किस नाम से संबोधित किया जाता है, उसका प्रभाव उस संस्था के प्रति लोगों की धारणा पर भी पड़ सकता है।
‘ओल्ड-एज होम’ की जगह ‘स्नेहलयम’ शब्द का इस्तेमाल करके सरकार बुजुर्गों के रहने की जगह को अधिक मानवीय और आत्मीय पहचान देना चाहती है। यह नाम इस विचार को मजबूत करता है कि बुजुर्गों की देखभाल केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय दायित्व भी है।
सामाजिक न्याय विभाग की महत्वपूर्ण पहल
यह फैसला सामाजिक न्याय विभाग की ओर से बुजुर्गों के कल्याण और उनके सम्मानजनक जीवन को लेकर उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्री के निर्देश के बाद अब संबंधित विभाग और संस्थानों को अपने रिकॉर्ड तथा साइनबोर्ड में आवश्यक बदलाव करने होंगे।
राज्य में वृद्धजन आबादी से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से संस्थागत देखभाल को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत महसूस की जाती रही है। ‘स्नेहलयम’ नामकरण को इसी दिशा में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
बुजुर्गों को अपनापन देने का संदेश
केरल सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा संदेश यही है कि वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और अपनापन मिलना चाहिए। ‘स्नेहलयम’ यानी प्यार का घर नाम के जरिए सरकार यह बताने का प्रयास कर रही है कि बुजुर्गों के लिए बनाए गए संस्थान केवल उनकी जरूरतों को पूरा करने की जगह नहीं, बल्कि उनके जीवन के इस पड़ाव में भावनात्मक सहारा देने वाले स्थान भी होने चाहिए।
अब राज्य में सरकारी और निजी प्रबंधन के तहत संचालित वृद्धाश्रमों के साइनबोर्ड और सरकारी रिकॉर्ड में धीरे-धीरे ‘ओल्ड-एज होम’ की जगह ‘स्नेहलयम’ दिखाई देगा। सरकार की यह पहल नाम परिवर्तन से आगे बढ़कर बुजुर्गों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश दे रही है।