तिरुवनंतपुरम: राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पाया है कि गहरे समुद्र में अपनी नाव से संतुलन बिगड़ने के बाद गिरे एक मछुआरे की मौत हार्ट अटैक (दिल का दौरा) पड़ने से हुई, जिसे एक दुर्घटना माना गया। आयोग ने फैसला सुनाया कि पीड़ित का परिवार बीमा कवरेज के तहत मुआवज़े का हकदार है।
कासरगोड के रहने वाले रघुनाथ भारी जाल खींचते समय नाव से गिर गए थे। उनका सिर लकड़ी की पारंपरिक नाव से टकराया था। रघुनाथ समेत पारंपरिक मछुआरों का बीमा मत्स्य बोर्ड और मत्स्यफेड (Matsyafed) ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और न्यू इंडिया एश्योरेंस के साथ कराया था। बीमा कंपनियों ने उनके परिवार के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण 'स्टेनोसिस' (धमनियों का सिकुड़ना) और 'एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन' (दिल का दौरा) बताया गया था। बीमा कंपनियों का तर्क था कि वे केवल दुर्घटना से हुई मौत के मामलों में ही भुगतान करने के लिए बाध्य हैं।
कासरगोड जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने परिवार की शिकायत में दम पाया। आयोग ने दोनों बीमा कंपनियों को संयुक्त रूप से और अलग-अलग 3 लाख रुपये का बीमा लाभ ब्याज सहित देने का निर्देश दिया। साथ ही, 10,000 रुपये का मुआवज़ा और 3,000 रुपये का खर्च भी देने का आदेश दिया गया।