कोच्चि: केरल हाई कोर्ट ने CMRL-एक्सलॉजिक मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है, उसमें शुरुआती जांच करना गैर-कानूनी है। हाई कोर्ट ने विजिलेंस डायरेक्टर को इस मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की ओर से सेक्शन 62 और 66 के तहत सौंपी गई रिपोर्ट, 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत अपराधों का मामला दर्ज करने के लिए काफी है।
मंथली पे-ऑफ मामले में, सरकार पहले इस बात पर सहमत हुई थी कि अगर आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो शुरुआती जांच ही काफी होगी। हालांकि, अब हाई कोर्ट के यह साफ करने के बाद कि मामला दर्ज किया जा सकता है, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पूर्व लोक निर्माण मंत्री मोहम्मद रियास के खिलाफ जल्द ही FIR दर्ज होने की संभावना है। कोर्ट का फैसला ED के इस रुख का समर्थन करता है कि FIR दर्ज किए बिना 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत आगे बढ़ना संभव नहीं है।
कोर्ट ने साफ किया कि शुरुआती जांच के बाद ही FIR दर्ज करने का विजिलेंस का रुख स्वीकार नहीं किया जा सकता। ED ने कोर्ट को बताया था कि पर्याप्त सबूत, गवाहों के बयान और डायरी एंट्री मौजूद हैं। ED ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि डायरी एंट्री के आधार पर सीधे FIR दर्ज की जा सकती है। हालांकि, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का हवाला देते हुए FIR दर्ज करने का विरोध किया था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद, विजिलेंस को शुरुआती जांच करने के साथ-साथ पिनाराई और रियास के खिलाफ FIR भी दर्ज करनी होगी।