तिरुवनंतपुरम: केरल हाई कोर्ट ने BJP पार्षद आर. सुगाथन को 'केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट' (KAAPA) के तहत हिरासत में रखने के आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले से तिरुवनंतपुरम कॉरपोरेशन में नई राजनीतिक जंग छिड़ गई है। LDF ने UDF पर BJP के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है।

LDF संसदीय दल के नेता एस. पी. दीपक ने आरोप लगाया, "हाई कोर्ट से सुगाथन को मिली राहत के पीछे राज्य स्तर पर UDF और BJP के बीच हुई डील का हाथ है। सरकार ने इस मामले में बहुत लापरवाही बरती और कोर्ट में ज़रूरी दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाई।"

उन्होंने सरकार पर कानूनी कार्यवाही के लिए ज़रूरी तैयारी न करने का आरोप लगाया। दीपक ने कहा, "चूंकि यह KAAPA का मामला था, इसलिए कोई तीसरी पार्टी कार्यवाही में दखल नहीं दे सकती। सरकार ज़रूरी दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रही। जमा किए गए दस्तावेज़ों में कई पन्ने गायब थे, जबकि गृह विभाग की ओर से भेजे गए कई रिकॉर्ड साफ नहीं थे।"

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही इस बात से साफ थी कि सुगाथन को जेल में रहते हुए भी पार्षद के तौर पर शपथ लेने की इजाज़त दी गई। दीपक ने काउंसिल से छह महीने की छुट्टी के लिए सुगाथन की अर्ज़ी पर की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री और स्थानीय स्व-शासन मंत्री ने कोई फैसला होने से पहले ही फाइल पर कार्रवाई कर दी थी।

कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज कर दिया। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने LDF पर बेबुनियाद आरोप लगाने का इल्ज़ाम लगाया। उन्होंने कहा, "ये सभी बेबुनियाद आरोप हैं। कोई डील नहीं हुई है और न ही इसकी कोई ज़रूरत है। जिन लोगों ने अतीत में समझौते किए थे, उन्हें अपने पाप धोने की कोशिशों में हमें घसीटने की ज़रूरत नहीं है।"

फैसले पर चेन्निथला ने कहा कि कांग्रेस न्यायिक फैसले की आलोचना नहीं करेगी और आगे कानूनी कदम उठाने का फैसला करने से पहले फैसले की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा, "यह कोर्ट का फैसला है। हम कोर्ट के फैसले की आलोचना नहीं कर सकते। हम फैसले की कॉपी की समीक्षा करेंगे और देखेंगे कि क्या कोई कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।"

 

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