कोच्चि: भाजपा को राहत देते हुए, केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (केएएपीए) के तहत तिरुवनंतपुरम निगम पार्षद आर सुगथन की निवारक हिरासत को रद्द कर दिया और केंद्रीय जेल और सुधार गृह के अधीक्षक, वियूर को उसे रिहा करने का आदेश दिया।
तिरुवनंतपुरम निगम पर वर्तमान में बहुत कम बहुमत के साथ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का शासन है। सुगाथन को 8 जून से छह महीने के लिए निवारक हिरासत में रखा गया था।
न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस की खंडपीठ ने सुगथन की पत्नी अश्वथी जीआर द्वारा दायर याचिका पर आदेश जारी किया, जिसमें हिरासत आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।
अदालत ने पाया कि जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट, तिरुवनंतपुरम द्वारा आदेश उचित दिमाग के इस्तेमाल या आवश्यक व्यक्तिपरक संतुष्टि के बिना पारित किया गया था।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील सौरव मिश्रा और वकील सुविन आर मेनन ने कहा कि हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी द्वारा विचार किए गए सात आपराधिक मामलों में से, सुगथन को पांच में जमानत दी गई थी। छठे में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि सातवें में उन्हें अग्रिम जमानत मिल गई थी. उन्होंने तर्क दिया कि प्राधिकरण ने इस बात पर ठीक से विचार नहीं किया कि क्या जमानत की शर्तें सुगाथन को भविष्य में इसी तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए पर्याप्त थीं।