Kottayam : इंटरलॉकिंग सड़क बनी मुसीबत, बारिश में घरों में घुस रहा पानी

Update: 2026-06-16 09:57 GMT

Kerala केरल: कोट्टायम जिले के पेरुमकुलंगारा इलाके में एक कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पंचायत चुनावों से कुछ महीने पहले पेरुमकुलंगारा मार्केट रोड पर कराए गए इंटरलॉकिंग काम के बाद अब बारिश के मौसम में आठ परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस काम को विकास के नाम पर किया गया था, वह अब उनके लिए समस्या बन गया है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क के दोनों तरफ इंटरलॉकिंग ब्लॉक्स लगाए जाने के कारण बारिश का पानी बाहर निकलने का कोई उचित रास्ता नहीं बचा है। नतीजतन, भारी बारिश के दौरान पानी सीधे आसपास के घरों में घुस जाता है। स्थिति इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि यहां के कई घर सड़क के स्तर से लगभग चार फीट नीचे बने हुए हैं।

लोगों का कहना है कि अगर सड़क के कम से कम एक तरफ जल निकासी के लिए नाली बनाई गई होती, तो बारिश का पानी आसानी से बाहर निकल जाता और घरों में जलभराव की स्थिति पैदा नहीं होती। लेकिन बिना उचित ड्रेनेज व्यवस्था के पूरा काम कर दिया गया, जिससे समस्या और बढ़ गई।

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य के दौरान पर्याप्त योजना नहीं बनाई और नाली निर्माण जैसे जरूरी पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया। लोगों का कहना है कि मौके पर नाली बनाने की पर्याप्त जगह मौजूद थी, लेकिन इसके बावजूद जल निकासी व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया।

ग्रामीणों ने इसे “ऊपर से दिखावा, अंदर से मुसीबत” जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि विकास कार्यों में दूरदर्शिता की कमी के कारण अब उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई घरों में बारिश का पानी घुसने से घरेलू सामान खराब हो रहा है और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

प्रभावित परिवारों का कहना है कि हर बारिश में उन्हें अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। पानी भरने की वजह से न केवल संपत्ति का नुकसान हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी खतरा बढ़ रहा है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क पर उचित ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

फिलहाल इस मामले में स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि बिना सही योजना और तकनीकी मूल्यांकन के किए गए निर्माण कार्य किस तरह आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बन सकते हैं।

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