तिरुवनंतपुरम: स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने लेफ्ट फ्रंट की सरकार के दौरान राज्य भर में 89 कोविड आइसोलेशन वार्ड बनाने में हुई कथित गड़बड़ियों और कमियों की उच्च-स्तरीय जांच की घोषणा की।
विधानसभा में कुन्नाथुनाद से कांग्रेस विधायक वी.पी. सजींद्रन के एक सवाल का जवाब देते हुए, मुरलीधरन ने कहा कि प्रोजेक्ट के काम और पैसे के इस्तेमाल की पूरी जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की अगुवाई में एक खास एक्सपर्ट टीम बनाई गई है।
सजींद्रन ने यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय हर आइसोलेशन वार्ड पर लगभग 1.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इनमें से कोई भी ढांचा अभी चालू हालत में नहीं है या इस्तेमाल के लायक नहीं है। उन्होंने गृह विभाग के तहत एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से जांच कराने के अलावा, कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों व पूर्व नेतृत्व के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
मुरलीधरन ने विधानसभा को बताया कि जो ढांचे बनकर तैयार हो गए थे या जो अधूरे बने थे, वे मरीजों की देखभाल या आइसोलेशन के काम के लायक नहीं थे। उन्होंने कहा कि 2,400 वर्ग फुट में फैले और टिन की छत वाले इन यूनिट्स में ढांचे से जुड़ी गंभीर कमियां थीं; जैसे कि छतें सीलिंग फैन का भार नहीं सह सकती थीं और इनमें सही एयर कंडीशनिंग, प्लंबिंग, बिजली का काम और चालू टॉयलेट जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं थीं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 250.69 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के लिए जुलाई 2021 में प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी। इसके लिए केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड और विधायक एसेट डेवलपमेंट फंड ने मिलकर पैसा दिया था, और केरल मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (KMSCL) ने इसे बनाने वाली एजेंसी के तौर पर काम किया था।