तिरुअनंतपुरम। केरल यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC) मोहनन कुन्नुम्मल ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए आरोप लगाया है कि कुछ विदेशी ताकतें जानबूझकर युवाओं को कमजोर बनाने और उन्हें ड्रग्स का आदी बनाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में युवाओं को जागरूक करना और उनके भविष्य को लेकर चिंता जताना उनकी जिम्मेदारी है।

कुन्नुम्मल की यह टिप्पणी उनके हालिया बयान पर उठे विवाद के बीच आई है। उन्होंने एक कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए छात्रों से कहा था कि वे ‘कॉकरोच’ नहीं, बल्कि मजबूत ‘शेर’ हैं। उनके बयान को लेकर आलोचना हुई थी, जिसके बाद उन्होंने अपने वक्तव्य का संदर्भ स्पष्ट किया।

‘मैं वही कर रहा हूं जो VC से उम्मीद है’

कुलपति ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के प्रमुख के तौर पर उनका काम केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। छात्रों के भविष्य, उनके चरित्र निर्माण और उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकना भी उनकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से बचाना जरूरी है। उनका दावा है कि कुछ विदेशी ताकतें युवाओं को कमजोर करने के लिए उन्हें ड्रग्स की ओर धकेलने की कोशिश कर रही हैं।

कुलपति के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री और परीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के सामाजिक और मानसिक विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।

कार्यक्रम में छात्रों से पूछा था सवाल

कुन्नुम्मल ने यह भी बताया कि जिस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘कॉकरोच’ और ‘शेर’ का उदाहरण दिया था, उसका उद्देश्य छात्रों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता पैदा करना था।

प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने मौजूद छात्रों से पूछा था कि यदि वे ‘कॉकरोच’ नहीं हैं तो अपनी आवाज उठाएं। हालांकि, उनकी इस अपील पर केवल एक-दो छात्रों ने ही प्रतिक्रिया दी।

बाद में उनके इस बयान की आलोचना होने लगी। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि छात्रों की तुलना ‘कॉकरोच’ से करने का क्या औचित्य था। इसके बाद कुलपति ने घटना का संदर्भ बताते हुए कहा कि दर्शक दीर्घा में मौजूद बच्चे काफी छोटे थे और संभव है कि वे उनके सवाल का आशय समझ ही नहीं पाए हों।

छोटे बच्चों के चुप रहने की बताई वजह

कुलपति ने कहा कि उन्होंने जब बच्चों से पूछा कि क्या वे ‘कॉकरोच’ हैं, तो कई बच्चे इस संदर्भ को समझ नहीं सके। यही वजह थी कि उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

उनका कहना था कि कार्यक्रम में मौजूद बच्चों की उम्र और उनके संदर्भ को समझे बिना केवल इस आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि वे सवाल का जवाब क्यों नहीं दे पाए।

कुलपति ने अपने संबोधन में ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल एक प्रतीक के तौर पर किया था। उनका संदेश था कि युवाओं को परिस्थितियों के सामने कमजोर होकर नहीं झुकना चाहिए, बल्कि आत्मविश्वास और साहस के साथ चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

नशे के खिलाफ जागरूकता पर जोर

कुन्नुम्मल ने युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को गंभीर सामाजिक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा शिक्षा, कौशल विकास, खेल और सकारात्मक गतिविधियों में लगाने की अपील की। उनका कहना था कि विद्यार्थी देश का भविष्य हैं और उन्हें नशे तथा अन्य गलत आदतों से बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युवाओं को प्रभावित करने वाले माध्यमों और गतिविधियों पर सतर्क नजर रखने की आवश्यकता है। हालांकि, विदेशी ताकतों से जुड़े उनके आरोपों के समर्थन में उन्होंने किसी विशिष्ट संगठन या देश का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं बताया।

बयान के बाद तेज हुई बहस

कुलपति के बयान के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि विश्वविद्यालय के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह युवाओं को प्रेरित करने के लिए स्पष्ट और संतुलित भाषा का इस्तेमाल करे।

दूसरी ओर, उनके समर्थकों का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने और उन्हें मजबूत मानसिकता के लिए प्रेरित करने का उनका उद्देश्य सकारात्मक था। उनका मानना है कि बयान को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

कुलपति ने भी अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मकसद किसी छात्र या बच्चे का अपमान करना नहीं था। वह विद्यार्थियों को कमजोर मानसिकता से बाहर निकालकर आत्मविश्वासी और मजबूत बनाने का संदेश देना चाहते थे।

युवाओं के भविष्य पर चिंता

मोहनन कुन्नुम्मल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने आज शिक्षा और रोजगार के साथ कई सामाजिक चुनौतियां भी हैं। नशे की लत उनमें से एक गंभीर समस्या है। ऐसे में शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को जागरूक करें और उन्हें सकारात्मक दिशा दिखाएं।

‘कॉकरोच’ और ‘शेर’ की तुलना को लेकर भले ही विवाद खड़ा हुआ हो, लेकिन कुलपति ने अपने बयान के माध्यम से युवाओं को मजबूत, आत्मविश्वासी और नशे से दूर रहने का संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह अपने पद की जिम्मेदारी के अनुरूप ही छात्रों के हित में बोल रहे थे।

फिलहाल उनके विदेशी ताकतों संबंधी आरोपों और ‘कॉकरोच’ वाले बयान को लेकर बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन युवाओं को नशे से दूर रखने और उनके मानसिक एवं सामाजिक विकास के लिए कौन से ठोस कदम उठाता है।

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