कोच्चि: हाई कोर्ट ने शनिवार को सरकार के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है। इस नए बोर्ड में IUML नेता एम.सी. मायन हाजी को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि इससे पहले वाले बोर्ड को उसके गठन के सात महीने से भी कम समय में भंग कर दिया गया था।
जस्टिस एस. मनु ने यह आदेश वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के.एस. हम्सा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें सरकार के इस नए आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने शनिवार को एक विशेष बैठक की और लगभग तीन घंटे तक इस मामले पर सुनवाई की।
सिंगल जज ने कहा, "इसलिए, आदेश पर रोक लगाने की मांग को खारिज किया जाता है। हालांकि, इन याचिकाओं में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण तर्क दिए गए हैं जिन पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता है। इसलिए, मैं निर्देश देता हूं कि बोर्ड का पुनर्गठन इन याचिकाओं के अंतिम फैसले के अधीन होगा।"
कोर्ट ने पाया कि इस मामले में उठने वाले मुद्दे, एक जनहित याचिका (PIL) और डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित अन्य संबंधित मामलों से गहराई से जुड़े हुए हैं। इसलिए, कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट अधिनियम की धारा 3 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, इन याचिकाओं को डिवीजन बेंच के पास सुनवाई और फैसले के लिए भेजने का निर्णय लिया।
कोर्ट ने गौर किया कि डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था जो उसे बोर्ड के गठन को कानून के अनुरूप बनाने के लिए कदम उठाने से रोकता हो।
14 सितंबर को पारित एक आदेश में, डिवीजन बेंच ने एडवोकेट जनरल के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया था, जिसमें सरकार को पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो सप्ताह का समय देने की मांग की गई थी।