केरल CM पिनराई विजयन ने जारी किया 'व्हाइट पेपर', बोले LDF शासन में कर्ज का बोझ घटा

Update: 2026-07-14 13:51 GMT

Thiruvananthapuram : केरल में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने मंगलवार को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार द्वारा जारी 'श्वेत पत्र' (White Paper) के जवाब में 'तथ्यों का श्वेत पत्र' (White Paper of Facts) जारी किया। उन्होंने दावा किया कि UDF सरकार के श्वेत पत्र में "तथ्यात्मक रूप से गलत बातें" कही गई हैं।विजयन ने कहा कि इस दस्तावेज़ का मकसद लोगों के सामने सही तथ्य रखना था।उन्होंने कहा, "UDF सरकार ने अपने श्वेत पत्र में तथ्यात्मक रूप से गलत बातें भरी हैं। हमने लोगों के सामने इन बातों की सच्चाई लाने के लिए 'तथ्यों का श्वेत पत्र' जारी किया है।"राज्य की आर्थिक स्थिति के बारे में सरकार के दावों को खारिज करते हुए विजयन ने कहा कि LDF सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान कर्ज का बोझ कम किया था। उन्होंने कहा, "यह दावा गलत है कि LDF सरकार के दस वर्षों के दौरान राज्य की कुल देनदारियां बेतहाशा बढ़ीं। LDF के कार्यकाल के दौरान कर्ज का बोझ असल में कम हुआ था। मौजूदा राज्य सरकार असली आंकड़े छिपाकर यह प्रचार कर रही है कि राज्य पर 5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का कर्ज है। यह प्रचार भी गलत है कि केरल में फिजूलखर्ची हुई थी।"उन्होंने आगे कहा, "राज्य सरकार, BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा राज्य पर थोपी गई आर्थिक पाबंदियों जैसी नीतियों को सही ठहराने की कोशिश कर रही है। पहले से घोषित कार्यक्रमों में रुकावट साफ तौर पर दिखाती है कि वादों को पूरा नहीं किया जाएगा।"

4 जून को राज्य की विधानसभा में केरल की आर्थिक स्थिति पर जो श्वेत पत्र पेश किया गया था, उसमें राज्य की वित्तीय हालत की खराब तस्वीर दिखाई गई थी। इसमें कहा गया था कि नई यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार को भारी कर्ज, बढ़ती देनदारियों और लगातार खजाने पर दबाव वाले गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। वित्तीय रिपोर्ट की मुख्य बातों से पता चला कि केरल का कुल सार्वजनिक कर्ज 5.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि राज्य के राजस्व का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे तय खर्चों में ही चला जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए बहुत कम पैसा बचता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विकास पर होने वाला पूंजीगत खर्च देश में सबसे कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल का कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत खर्च) उसके ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) का सिर्फ़ 1.3 प्रतिशत है, जो भारतीय राज्यों में सबसे कम में से एक है, जबकि राज्य का फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) सबसे ज़्यादा है।

इसमें ट्रेज़री संकट की गंभीरता पर भी ज़ोर दिया गया है; बताया गया है कि राज्य 2025 में 262 दिनों तक 'वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज़' पर निर्भर रहा और साल के दौरान 84 दिनों तक ओवरड्राफ़्ट की स्थिति में रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, केरल के मुख्यमंत्री सतीसन ने कहा कि उनकी सरकार को 48,733 करोड़ रुपये की बकाया देनदारियां भी विरासत में मिली हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दिया जाने वाला महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का बकाया शामिल है।

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