तिरुवनंतपुरम: केरल की जेलों में कैदियों के खाने का मेन्यू बदलने का सुझाव दिया गया है। जेल विभाग के प्रमुख एस. श्रीजीत के प्रस्तावों के अनुसार, मेन्यू से मटन और मछली हटाने से हर साल 10 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। सुझाव यह भी है कि इससे कैदियों की सेहत से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। मटन और मछली की जगह चिकन करी, सोया चंक्स और अंडे देने का सुझाव दिया गया है।
अभी मटन हफ्ते में एक बार और मछली हफ्ते में
दो बार परोसी जाती
है। सोमवार और बुधवार को लंच में 140 ग्राम मछली करी दी जाती है, जबकि शनिवार को लंच में 100 ग्राम मटन दिया जाता है। मटन पर सालाना खर्च 5.75 करोड़ रुपये है, जबकि मछली पर 4.8 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अगर मटन की जगह चिकन करी दी जाए, तो खर्च सिर्फ़ 1.26 करोड़ रुपये होगा। मछली की जगह सोया और अंडे देने पर 3.4 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
इस बीच, सरकार को सेंट्रल जेल का नाम बदलकर 'करेक्शनल एंड मैनेजमेंट सेंटर' और ज़िला जेलों व सब-जेलों का नाम बदलकर 'ट्रांज़िट जस्टिस होम्स' करने का सुझाव भी दिया गया है। जेल मुख्यालय का नाम बदलकर 'डिपार्टमेंट ऑफ़ करेक्शनल सर्विसेज़ हेडक्वार्टर' करने का सुझाव भी है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इन प्रस्तावों पर कोई फ़ैसला नहीं लिया है।
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