कासरगोड। कुंबला क्षेत्र में अनंतपुरम ऑयल फैक्ट्री से कथित तौर पर हो रहे प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश एक बार फिर बढ़ गया है। आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाली तेज बदबू के कारण उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि स्थिति इतनी खराब हो गई है कि घरों में रहना, खाना पकाना और भोजन करना तक मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, फैक्ट्री के आसपास रहने वाले परिवार लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रदूषण और बदबू का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। कई बच्चों को खांसी और सांस लेने में परेशानी होने की शिकायत सामने आ रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ बच्चों को इलाज के लिए नियमित रूप से अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
बदबू से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री से आने वाली बदबू के कारण घरों में दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने के बावजूद परेशानी कम नहीं होती। लोगों के अनुसार, दुर्गंध का असर आसपास के कई इलाकों तक महसूस किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि सुबह से लेकर दिन के अलग-अलग समय में बदबू की समस्या बनी रहती है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों के लिए स्थिति इस स्तर तक पहुंच गई है कि वे घर में भोजन तैयार करने से भी परेशान हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण की समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका है। खास तौर पर बच्चों में सांस संबंधी शिकायतों को लेकर अभिभावक चिंतित हैं।
बच्चों की सेहत को लेकर चिंता
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई बच्चों को खांसी और सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, प्रभावित बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
हालांकि, इन स्वास्थ्य समस्याओं का सीधा संबंध फैक्ट्री के प्रदूषण से है या नहीं, इसकी चिकित्सकीय और पर्यावरणीय जांच की जरूरत होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को मामले की गंभीरता से जांच करानी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि फैक्ट्री से निकलने वाले पदार्थों या दुर्गंध का स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ रहा।
वादे पूरे नहीं करने का आरोप
ग्रामीणों और एक्शन कमेटी का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने पहले प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान को लेकर कुछ आश्वासन दिए थे। लेकिन उनके मुताबिक, इन वादों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई बार अपनी शिकायतें फैक्ट्री प्रबंधन के सामने रख चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि फैक्ट्री मालिक प्रभावित परिवारों के साथ किए गए वादों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी वजह से अब लोगों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है।
ओणम के बाद होगा सार्वजनिक प्रदर्शन
समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों और एक्शन कमेटी ने ओणम त्योहार के बाद सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को व्यापक बनाया जाएगा।
एक्शन कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत दिलाना है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग फैक्ट्री की गतिविधियों की जांच करें और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए। साथ ही फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध और कथित प्रदूषण के स्रोत की जांच की जानी चाहिए।
लोग यह भी चाहते हैं कि पर्यावरणीय मानकों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों के पालन की जांच की जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फैक्ट्री प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी
फिलहाल स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए आरोपों पर फैक्ट्री प्रबंधन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के संबंध में प्रबंधन का क्या पक्ष है और पूर्व में प्रभावित लोगों को लेकर किए गए कथित आश्वासनों पर उसकी क्या स्थिति है।
मामले में प्रशासन और संबंधित पर्यावरणीय विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदूषण की वास्तविक वजह क्या है और फैक्ट्री संचालन से इसका कितना संबंध है।
आंदोलन की तैयारी से बढ़ा दबाव
फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों और एक्शन कमेटी के सार्वजनिक प्रदर्शन की घोषणा के बाद अब प्रशासन पर भी समस्या का समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं और अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।
कुंबला के अनंतपुरम क्षेत्र में प्रदूषण और दुर्गंध की शिकायत ने एक बार फिर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के आरोपों के बीच ग्रामीणों ने ओणम के बाद सार्वजनिक आंदोलन का फैसला किया है। अब लोगों की नजर प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर है।