कोट्टायम। शहर और आसपास के इलाकों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से पिछली सरकार के कार्यकाल में विधायक विकास निधि से लगाए गए अधिकांश सीसीटीवी कैमरे अब खराब हो चुके हैं। करीब आधे करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए इन कैमरों के खराब होने से सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि नियमित देखरेख और उचित रखरखाव के अभाव में कैमरे धीरे-धीरे काम करना बंद करते गए।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2023 में शहर और उसके आसपास के महत्वपूर्ण तथा भीड़भाड़ वाले इलाकों में कुल 44 कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों का उद्देश्य प्रमुख जंक्शनों, सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैंड और अन्य संवेदनशील स्थानों पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना था। कैमरे लगाए जाने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इससे शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और किसी भी आपराधिक घटना की स्थिति में पुलिस को जांच में मदद मिलेगी।
महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाए गए थे कैमरे
सीसीटीवी कैमरों को शहर के कई प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया गया था। इनमें पट्टीथानम जंक्शन, थवलकुझी, पडिनजारे नाडा, मंदिर परिसर, सेंट्रल जंक्शन, केएसआरटीसी बस स्टैंड और निजी बस स्टैंड सहित अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल थे।
इन स्थानों का चयन इसलिए किया गया था क्योंकि यहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। जंक्शन और बस स्टैंड जैसे स्थानों पर सीसीटीवी निगरानी से यातायात प्रबंधन के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में भी मदद मिल सकती थी।
मंदिर परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कैमरे लगाए जाने का उद्देश्य भीड़ के दौरान निगरानी बनाए रखना और किसी अप्रिय घटना की स्थिति में रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराना था।
रखरखाव नहीं होने से बिगड़ी स्थिति
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कैमरे लगाने के बाद उनके नियमित रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। तकनीकी खराबी, बिजली या नेटवर्क से जुड़ी समस्याओं और उपकरणों की मरम्मत समय पर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में कैमरे अब काम नहीं कर रहे हैं।
सीसीटीवी सिस्टम केवल कैमरा लगाने से प्रभावी नहीं होता। इसके लिए नियमित तकनीकी जांच, बिजली आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी, रिकॉर्डिंग सिस्टम और खराब उपकरणों की समय पर मरम्मत आवश्यक होती है। यदि इनमें से किसी एक व्यवस्था में भी लंबे समय तक समस्या बनी रहे तो पूरा निगरानी तंत्र प्रभावित हो सकता है।
बताया जा रहा है कि 2023 में लगाए गए कैमरों में से अधिकांश के खराब होने के बाद अब कई महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी व्यवस्था कमजोर हो गई है।
सुरक्षा व्यवस्था को झटका
शहर के प्रमुख इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों का खराब होना पुलिस और आम लोगों दोनों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। किसी अपराध, सड़क हादसे, चोरी या अन्य घटना की स्थिति में सीसीटीवी फुटेज जांच के लिए महत्वपूर्ण साबित होती है।
किसी घटना के बाद पुलिस अक्सर आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग के जरिए संदिग्ध व्यक्तियों, वाहनों और घटनाक्रम की जानकारी जुटाती है। ऐसे में कैमरे काम नहीं करने की स्थिति में जांच एजेंसियों के पास एक महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य का अभाव हो सकता है।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी व्यवस्था कमजोर होने से स्थानीय लोगों में भी चिंता पैदा हो सकती है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े उपकरणों को केवल स्थापित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें लगातार चालू स्थिति में रखना भी उतना ही जरूरी है।
लाखों रुपये का खर्च, अब मरम्मत की जरूरत
इन कैमरों को लगाने में करीब आधे करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी। यह राशि विधायक विकास निधि से खर्च किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में कैमरों का खराब होना सरकारी धन के उपयोग और उसके बाद की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
लोगों का कहना है कि यदि कैमरों के रखरखाव के लिए शुरुआत से ही स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाती और नियमित तकनीकी निरीक्षण किया जाता तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती। अब दोबारा कैमरों की मरम्मत या उन्हें बदलने पर अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
इससे पहले खर्च की गई राशि के बावजूद यदि निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं रह पाती है तो यह सार्वजनिक धन के बेहतर इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़ा करता है।
जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों की मांग है कि प्रशासन को इस मामले की समीक्षा करनी चाहिए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि कैमरों की देखरेख की जिम्मेदारी किस एजेंसी या विभाग को दी गई थी और खराब होने के बाद उनकी मरम्मत के लिए क्या कदम उठाए गए।
साथ ही यह भी जांच की जरूरत है कि कैमरों के रखरखाव के लिए कोई वार्षिक अनुबंध या तकनीकी सहायता व्यवस्था थी या नहीं। यदि रखरखाव की जिम्मेदारी किसी एजेंसी को दी गई थी तो उसके काम की समीक्षा भी की जानी चाहिए।
लोगों का कहना है कि शहर की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों को लंबे समय तक निष्क्रिय छोड़ना उचित नहीं है। प्रशासन को खराब कैमरों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें दुरुस्त कराना चाहिए।
दोबारा सक्रिय करने की जरूरत
शहर में अपराध नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सीसीटीवी नेटवर्क को फिर से प्रभावी बनाना जरूरी माना जा रहा है। इसके लिए सभी 44 कैमरों की तकनीकी जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि कितने कैमरों की मरम्मत संभव है और कितनों को बदलने की जरूरत है।
इसके साथ ही भविष्य में कैमरे लगाने से पहले उनके रखरखाव की दीर्घकालिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है। बिजली, इंटरनेट कनेक्शन, रिकॉर्डिंग क्षमता और तकनीकी सहायता जैसी व्यवस्थाओं को भी नियमित रूप से जांचना होगा।
2023 में करीब आधे करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए 44 कैमरों का अधिकांश हिस्सा खराब होने की खबर ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सरकारी योजनाओं में उपकरण स्थापित करने के बाद उनके रखरखाव पर कितना ध्यान दिया जाता है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और शहर की निगरानी व्यवस्था को कब तक पूरी तरह बहाल किया जाता है।