मैसूर : दुनिया भर में प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। ऐतिहासिक जंबो सवारी में शामिल होने वाले हाथियों की विशेष देखभाल और प्रशिक्षण पर वन विभाग का पूरा ध्यान है। इसी तैयारी के तहत रविवार को जंबो सवारी के पहले बैच में शामिल होने वाले नौ हाथियों का वजन किया गया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों का वजन नियमित प्रशिक्षण शुरू करने से पहले लिया गया, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का सही आकलन किया जा सके। वजन के आधार पर हाथियों के खान-पान और देखभाल की योजना तैयार की जाती है।

श्रीकांत हाथी निकला सबसे भारी

वजन जांच के दौरान श्रीकांत हाथी सबसे भारी पाया गया। वन विभाग के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (DCF) प्रभुगौड़ा के अनुसार, श्रीकांत का वजन 5,770 किलोग्राम दर्ज किया गया।

वहीं, एकलव्य हाथी 5,610 किलोग्राम वजन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। अधिकारियों ने बताया कि सभी हाथियों का स्वास्थ्य सामान्य है और जंबो सवारी के लिए उन्हें धीरे-धीरे तैयार किया जा रहा है।

वजन बढ़ाना नहीं स्वास्थ्य जांच है उद्देश्य

DCF प्रभुगौड़ा ने स्पष्ट किया कि हाथियों का वजन मापने का उद्देश्य उनका वजन बढ़ाना नहीं है। उन्होंने कहा कि वजन जांच का मुख्य मकसद हाथियों के स्वास्थ्य पर नजर रखना है।

उन्होंने बताया कि वजन के आधार पर प्रत्येक हाथी के लिए भोजन की मात्रा और पोषण योजना तय की जाती है। हर हाथी की उम्र, शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उसकी डाइट तैयार की जाती है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ और फिट हाथी ही जंबो सवारी जैसे बड़े आयोजन में सुरक्षित तरीके से हिस्सा ले सकते हैं।

जंबो सवारी मैसूर दशहरा का मुख्य आकर्षण

मैसूर दशहरा देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल है। इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण विजयदशमी के दिन निकलने वाली जंबो सवारी होती है।

इस दौरान सजे-धजे हाथियों का दल शहर की सड़कों से होकर गुजरता है। सबसे खास आकर्षण उस हाथी का होता है, जो स्वर्ण हौदा लेकर चलता है। इस परंपरा को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक मैसूर पहुंचते हैं।

हाथियों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

जंबो सवारी में शामिल होने वाले हाथियों को कई चरणों में प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें भीड़, तेज आवाज, संगीत और उत्सव के माहौल के लिए तैयार किया जाता है।

वन विभाग के विशेषज्ञ हाथियों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखते हैं। किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत उपचार और देखभाल की व्यवस्था की जाती है।

अधिकारियों का कहना है कि हाथियों की सुरक्षा और आराम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

परंपरा और संस्कृति से जुड़ा आयोजन

मैसूर दशहरा की परंपरा कई वर्षों पुरानी है और यह कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जंबो सवारी में हाथियों की भूमिका हमेशा से विशेष रही है।

हाथियों को सिर्फ आयोजन का हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि उन्हें इस परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है। इसलिए उनकी देखभाल और प्रशिक्षण को लेकर वन विभाग अतिरिक्त सावधानी बरतता है।

तैयारियों पर प्रशासन की नजर

दशहरा उत्सव को सफल बनाने के लिए प्रशासन, वन विभाग और अन्य संबंधित विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और आयोजन से जुड़ी अन्य तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।

हाथियों के पहले बैच की स्वास्थ्य जांच और वजन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उनके नियमित प्रशिक्षण की शुरुआत की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी जंबो सवारी को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। मैसूर दशहरा के शुरू होने से पहले हाथियों की तैयारी इस ऐतिहासिक आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

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