VTU में नए इंजीनियरिंग कॉलेजों के आवेदन पर सवाल, मंत्री भी हैरान, 10 प्रपोजल में 6 बेंगलुरु से

Update: 2026-05-05 06:20 GMT

Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में इंजीनियरिंग शिक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर हर साल इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती हैं, वहीं दूसरी ओर विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) को 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए नए इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू करने के लिए 10 नए आवेदन मिले हैं।

इन 10 आवेदनों में से 6 बेंगलुरु से आए हैं, जबकि एक-एक आवेदन बेंगलुरु ग्रामीण जिले के डोड्डाबल्लापुर, बेलगावी के चिक्कोडी, हुबली और विजयपुरा से प्राप्त हुआ है। सभी प्रस्तावित कॉलेजों ने प्रत्येक में 120-120 सीटों के लिए प्रवेश की अनुमति मांगी है।

यह स्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिले की मांग लगातार घट रही है और कई कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं। इसके बावजूद नए कॉलेज खोलने के लिए आवेदन आना शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

राज्य के हायर एजुकेशन मंत्री डॉ. एम. सी. सुधाकर ने इस पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की मांग समझ से परे है। मंत्री ने कहा, “मुझे नहीं पता कि लोग अभी भी नए इंजीनियरिंग कॉलेज क्यों खोलना चाहते हैं। यह देखकर मैं खुद हैरान हूं कि इस साल भी VTU को नए कॉलेजों के आवेदन मिले हैं।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इंजीनियरिंग शिक्षा में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन बढ़ता जा रहा है। कई कॉलेजों में न केवल सीटें खाली रह रही हैं, बल्कि कुछ संस्थानों को संचालन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके बावजूद नए कॉलेजों के लिए आवेदन यह संकेत देता है कि निजी संस्थान अब भी इंजीनियरिंग शिक्षा को एक व्यावसायिक अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, बदलते रोजगार बाजार और तकनीकी क्षेत्रों में कौशल आधारित शिक्षा की मांग के कारण इंजीनियरिंग डिग्री की पारंपरिक लोकप्रियता में कमी आई है।

VTU प्रशासन अब इन सभी आवेदनों की जांच कर रहा है और यह देखा जाएगा कि प्रस्तावित कॉलेज नियामक मानकों को पूरा करते हैं या नहीं। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और प्लेसमेंट जैसी आवश्यक शर्तों की समीक्षा की जाएगी।

शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में कई नए कॉलेजों के सामने भी छात्रों की कमी की चुनौती खड़ी हो सकती है।

फिलहाल, इस पूरे मामले ने एक बार फिर कर्नाटक में उच्च शिक्षा नीति और इंजीनियरिंग कॉलेजों की आवश्यकता पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है।

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