इंजीनियरिंग सीट कैंसलेशन को लेकर KEA कार्यालय में हंगामा, सैकड़ों छात्र और अभिभावक पहुंचे
बेंगलुरु। कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) के कैंपस में गुरुवार को इंजीनियरिंग सीट कैंसलेशन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। बड़ी संख्या में छात्र और उनके अभिभावक सीट रद्द कराने की मांग को लेकर KEA कार्यालय पहुंच गए। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
छात्रों और अभिभावकों का कहना था कि इंजीनियरिंग सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया के बाद उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वे अपनी सीट कैंसल कराने और काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर निकलने के लिए व्यक्तिगत रूप से आवेदन करना चाहते थे।
वहीं, KEA अधिकारियों का कहना है कि दूसरे राउंड में इंजीनियरिंग सीट अलॉट होने वाले उम्मीदवारों के लिए ऑनलाइन कैंसलेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक कार्यालय पहुंच गए।
सीट कैंसलेशन को लेकर छात्रों में नाराजगी
जानकारी के अनुसार, KEA की काउंसलिंग प्रक्रिया के दूसरे राउंड में कई छात्रों को इंजीनियरिंग सीटें आवंटित हुई थीं। कुछ छात्र इन सीटों को स्वीकार नहीं करना चाहते थे और काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर निकलने की मांग कर रहे थे।
छात्रों और अभिभावकों का आरोप था कि सीट कैंसलेशन की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी गई। इसी कारण उन्हें KEA कार्यालय आकर अपनी समस्या बतानी पड़ी।
कई अभिभावकों ने मांग की कि सीट कैंसलेशन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।
KEA ने ऑनलाइन सुविधा का दिया विकल्प
KEA अधिकारियों के अनुसार, इंजीनियरिंग सीट कैंसलेशन के लिए अब केवल ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दूसरे राउंड में सीट अलॉट होने वाले उम्मीदवार, जो आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेना चाहते, वे ऑनलाइन कैंसलेशन विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक कार्यालय पहुंच जाएंगे। KEA का कहना है कि प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है ताकि छात्रों को कार्यालय आने की जरूरत न पड़े।
छात्रों को जानकारी देने में कमी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों और अभिभावकों ने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिली। कई लोगों को यह स्पष्ट नहीं था कि सीट कैंसलेशन के लिए कौन-कौन से कदम उठाने होंगे।
अभिभावकों का कहना था कि इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया में छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है, इसलिए हर चरण की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने KEA से मांग की कि छात्रों के लिए हेल्पलाइन और सहायता केंद्रों को और प्रभावी बनाया जाए।
अधिकारियों ने संभाली स्थिति
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए KEA अधिकारियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने छात्रों को ऑनलाइन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी और बताया कि उनकी समस्याओं का समाधान नियमों के अनुसार किया जाएगा।
KEA की ओर से कहा गया कि काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संचालित किया जा रहा है और छात्रों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
प्रवेश प्रक्रिया पर बढ़ी निगरानी
इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया हर साल बड़ी संख्या में छात्रों को प्रभावित करती है। सीट अलॉटमेंट, फीस भुगतान, सीट लॉक और कैंसलेशन जैसे चरणों में छोटी सी गलती भी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
इसी वजह से KEA लगातार छात्रों को समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता है। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है।
आगे भी छात्रों की समस्याओं पर नजर
गुरुवार की घटना के बाद KEA अब छात्रों और अभिभावकों की समस्याओं को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल सीट कैंसलेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से जारी रहेगी। KEA ने छात्रों से अपील की है कि वे कार्यालय आने के बजाय निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया का पालन करें और आधिकारिक वेबसाइट पर जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।
इंजीनियरिंग सीट कैंसलेशन को लेकर हुए इस विवाद ने एक बार फिर प्रवेश प्रक्रियाओं में बेहतर संवाद और स्पष्ट जानकारी की जरूरत को सामने ला दिया है।