बेंगलुरु। इंजीनियरिंग समेत विभिन्न स्नातक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीट आवंटन प्रक्रिया का तीसरा और अंतिम दौर पूरा हो गया है। कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण यानी केईए ने अंतिम चरण समाप्त होने के बाद खाली बची सीटें समझौते के अनुसार संबंधित कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी को सौंप दी हैं। सीट प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 11 सितंबर तक आवंटित कॉलेज में उपस्थित होकर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

तीसरे दौर के बाद भी इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और नर्सिंग पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में कुल 24,283 सीटों का आवंटन नहीं हो सका। आर्किटेक्चर पाठ्यक्रम में भी 252 सीटें रिक्त रह गई हैं। इंजीनियरिंग के अलावा नर्सिंग में सबसे ज्यादा खाली सीटें दर्ज की गई हैं।

केईए के कार्यकारी निदेशक एच. प्रसन्ना ने बताया कि नर्सिंग पाठ्यक्रम में कुल 36,238 सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से केवल 13,407 सीटों का आवंटन हो सका है। केईए की ओर से नर्सिंग में 22,832 सीटें खाली रहने की जानकारी दी गई है। हालांकि, दिए गए कुल और आवंटित सीटों के आंकड़ों का अंतर 22,831 बैठता है। आधिकारिक अंतिम आंकड़े में एक सीट के इस अंतर पर स्पष्टीकरण अपेक्षित है।

केईए ने विद्यार्थियों से कहा है कि जिन अभ्यर्थियों को अंतिम दौर में सीट आवंटित की गई है, वे समयसीमा का इंतजार किए बिना प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी कर लें। विद्यार्थियों को आवंटन पत्र डाउनलोड करने, आवश्यक शुल्क जमा करने और मूल दस्तावेजों के साथ संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट करने की जरूरत होगी। निर्धारित तारीख तक रिपोर्ट नहीं करने पर सीट से संबंधित दावा प्रभावित हो सकता है।

तीसरे और अंतिम दौर के बाद खाली सीटों को संबंधित संस्थानों के प्रबंधन या गवर्निंग बॉडी को लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। इसके बाद इन सीटों पर प्रवेश का फैसला लागू नियमों, सरकारी समझौते और संस्थागत व्यवस्था के अनुसार किया जा सकता है। कॉलेजों को खाली सीटों की संख्या तथा पाठ्यक्रमवार उपलब्धता की जानकारी उपलब्ध करा दी गई है।

इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में 24 हजार से अधिक सीटें खाली रहना तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थियों की रुचि परंपरागत इंजीनियरिंग शाखाओं से हटकर कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा जैसे नए पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ी है। इसके कारण कुछ लोकप्रिय शाखाओं और कॉलेजों में सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है, जबकि अन्य संस्थानों तथा पारंपरिक शाखाओं में सीटें खाली रह जाती हैं।

कॉलेज का स्थान, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, फीस, उपलब्ध सुविधाएं और पाठ्यक्रम की रोजगार क्षमता भी विद्यार्थियों की पसंद को प्रभावित करती हैं। बड़े शहरों और प्रतिष्ठित संस्थानों में सीटें जल्दी भर जाती हैं, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों को दाखिले के लिए पर्याप्त विद्यार्थी नहीं मिल पाते। बड़ी संख्या में खाली सीटें रहने के पीछे एक कारण विद्यार्थियों का दूसरे राज्यों, निजी विश्वविद्यालयों या वैकल्पिक पाठ्यक्रमों का चयन करना भी हो सकता है।

आर्किटेक्चर पाठ्यक्रम में खाली रह गई 252 सीटों से भी विद्यार्थियों की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है। आर्किटेक्चर की पढ़ाई में लंबी अवधि, विशेष प्रशिक्षण और व्यावसायिक पंजीकरण जैसी आवश्यकताएं होती हैं। इसके साथ ही पाठ्यक्रम की फीस और रोजगार की संभावनाएं भी विद्यार्थियों तथा अभिभावकों के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

नर्सिंग में 22 हजार से अधिक सीटें खाली रहना विशेष रूप से ध्यान खींचने वाला मामला है। स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मचारियों की मांग लगातार बनी रहती है, लेकिन कुल सीटों के मुकाबले आवंटन काफी कम हुआ है। इसके पीछे कॉलेजों की गुणवत्ता, मान्यता, फीस, छात्रावास की सुविधा, क्लिनिकल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी चिंताएं कारण हो सकती हैं। हालांकि, रिक्त सीटों के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत पाठ्यक्रम और कॉलेजवार विश्लेषण से ही लगाया जा सकेगा।

नर्सिंग की 36,238 सीटों में से केवल 13,407 सीटों का आवंटन होना बताता है कि उपलब्ध क्षमता का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो पाया। इससे कॉलेजों के संचालन, शिक्षकों और आधारभूत सुविधाओं पर किए गए निवेश पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भविष्य की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, खाली सीटों की समस्या का समाधान केवल अतिरिक्त प्रवेश दौर आयोजित करने से नहीं होगा। कॉलेजों को शिक्षा की गुणवत्ता, प्रयोगशाला, प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और उद्योगों से साझेदारी पर ध्यान देना होगा। विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की वास्तविक रोजगार संभावनाओं और उपलब्ध करियर विकल्पों की सही जानकारी देना भी जरूरी है।

केईए की सीट आवंटन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब कॉलेजों में रिपोर्टिंग और दस्तावेज सत्यापन महत्वपूर्ण चरण है। विद्यार्थियों को प्रवेश के समय आवंटन पत्र, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, पहचान पत्र और संबंधित श्रेणी के दस्तावेज साथ रखने चाहिए। कॉलेज से शुल्क और दस्तावेजों की जानकारी पहले प्राप्त करने पर अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सकता है।

अंतिम दौर के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहना उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा की योजना पर पुनर्विचार की आवश्यकता को दर्शाता है। सरकार और शिक्षा संस्थानों को यह समझना होगा कि किन पाठ्यक्रमों में जरूरत से अधिक सीटें हैं और किन क्षेत्रों में विद्यार्थियों की मांग बढ़ रही है। इसी आधार पर भविष्य में सीटों की संख्या, नए पाठ्यक्रम और संस्थानों की गुणवत्ता से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

फिलहाल सीट प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के लिए 11 सितंबर तक संबंधित कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। वहीं, खाली सीटों की आगे की प्रवेश प्रक्रिया अब कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी द्वारा निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।

Tags: