बेंगलुरु। कर्नाटक के मांड्या जिले में प्रस्तावित दो महत्वपूर्ण औद्योगिक परीक्षण केंद्रों के लिए जमीन आवंटन में हो रही देरी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच मामला चर्चा में आ गया है। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगभग दस महीने बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि का आवंटन नहीं किया है। इससे ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।ये दोनों परियोजनाएं ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की ओर से प्रस्तावित हैं। इनमें निर्माण एवं बुनियादी ढांचा उपकरण परीक्षण केंद्र (CIE) और इलेक्ट्रिक वाहन परीक्षण केंद्र (EV) शामिल हैं।
दस महीने से जमीन आवंटन का इंतजार
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने अपने पत्र में कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर पिछले दस महीनों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार और संबंधित संस्थानों ने राज्य के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं।इसके बावजूद जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि परियोजनाओं के लिए संभावित स्थानों का निरीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और संबंधित विभागों के बीच पत्राचार पहले ही किया जा चुका है।कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने का अनुरोध किया है।
दो महत्वपूर्ण परीक्षण केंद्र बनाने की योजना
मांड्या में स्थापित होने वाले निर्माण एवं बुनियादी ढांचा उपकरण परीक्षण केंद्र का उद्देश्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा तथा तकनीकी क्षमता की जांच करना है।वहीं, इलेक्ट्रिक वाहन परीक्षण केंद्र में इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित नई तकनीकों, सुरक्षा प्रणालियों और प्रदर्शन का परीक्षण किया जा सकेगा।इन केंद्रों से वाहन निर्माताओं, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे कर्नाटक में आधुनिक वाहन प्रौद्योगिकी के विकास को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
करीब 160 एकड़ जमीन की आवश्यकता
परियोजना से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, निर्माण एवं बुनियादी ढांचा उपकरण परीक्षण केंद्र के लिए लगभग 100 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है।इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन परीक्षण केंद्र के लिए लगभग 60 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत है।कुमारस्वामी के पत्र के मुताबिक, ARAI की तकनीकी टीम ने मार्च 2026 में मांड्या जिले के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया था। इसके बाद मई और सितंबर में भी संभावित जमीनों का तकनीकी मूल्यांकन किया गया।बसारालु और येलेचाकनहल्ली सहित कुछ स्थानों पर जमीन की उपयुक्तता जांची गई। हालांकि सड़क संपर्क, निजी भूमि अधिग्रहण और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित चुनौतियां सामने आईं।
कई बैठकों के बाद भी नहीं निकला समाधान
कुमारस्वामी ने अपने पत्र में बताया कि 16 सितंबर 2026 को राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, मांड्या जिला प्रशासन और कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई थी।इसके बाद 28 सितंबर को ARAI ने जमीन आवंटन से संबंधित संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया।इस प्रस्ताव में पहले चरण में निर्माण उपकरण परीक्षण केंद्र के लिए जमीन उपलब्ध कराने और इलेक्ट्रिक वाहन परीक्षण केंद्र के लिए अतिरिक्त भूमि की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया था।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इतने प्रयासों के बावजूद अंतिम निर्णय लंबित रहना चिंता का विषय है।
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
कुमारस्वामी ने कहा कि दोनों परीक्षण केंद्रों की स्थापना से मांड्या और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।इन परियोजनाओं से इंजीनियरिंग, वाहन परीक्षण, अनुसंधान, तकनीकी सेवाओं और सहायक उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।उन्होंने कहा कि ऐसे आधुनिक केंद्र कर्नाटक को ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री से जल्द निर्णय लेने की मांग
कुमारस्वामी ने पत्र में राज्य सरकार से आवश्यक भूमि जल्द उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक को इस महत्वपूर्ण परियोजना का अवसर नहीं गंवाना चाहिए। उनके अनुसार, इस विषय को राजनीतिक मतभेदों से अलग रखकर राज्य के दीर्घकालिक औद्योगिक हितों के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए।फिलहाल जमीन आवंटन पर राज्य सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार है। भूमि उपलब्ध होने के बाद ही इन दोनों परीक्षण केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।