बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को देखते हुए राज्य सरकार ने भविष्य की बुनियादी सुविधाओं को लेकर व्यापक योजना बनाने की पहल की है। बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने अधिकारियों को पूरे बेंगलुरु शहरी जिले के लिए दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। इस योजना का उद्देश्य शहर और उसके आसपास के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भरोसेमंद पेयजल आपूर्ति, बेहतर सड़क संपर्क और भूमिगत सीवेज निकासी की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि योजना का दायरा ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) की मौजूदा सीमाओं से आगे भी रखा जाएगा, ताकि शहर के वास्तविक विस्तार के अनुरूप विकास किया जा सके।

शुक्रवार को विकास सौधा में आयोजित ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी की चौथी कार्यकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कहा कि बेंगलुरु का विस्तार पहले लगाए गए अनुमानों से कहीं अधिक तेजी से हो रहा है। ऐसे में पुरानी योजनाओं के आधार पर भविष्य की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय उन क्षेत्रों को भी ध्यान में रखा जाए, जो प्रशासनिक रूप से GBA की सीमा से बाहर हैं, लेकिन शहरी विकास और आबादी के विस्तार के कारण बेंगलुरु से सीधे जुड़े हुए हैं।

मास्टर प्लान में GBA से बाहर के इलाके भी होंगे शामिल

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास की योजना केवल मौजूदा GBA सीमा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बेंगलुरु शहरी जिले के उन इलाकों को भी शामिल किया जाए, जहां तेजी से आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और नए शहरी क्षेत्र विकसित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य में इन इलाकों की आबादी और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पेयजल आपूर्ति तथा सीवेज नेटवर्क की क्षमता का आकलन किया जाना चाहिए। इसके आधार पर अलग-अलग परियोजनाओं की प्राथमिकता तय हो और उन्हें निर्धारित समयसीमा के साथ चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि GBA से बाहर के मौजूदा मार्गों को बेहतर बनाने के साथ नई सड़कों का निर्माण भी मास्टर प्लान के अनुरूप किया जाए। इससे शहर के बाहरी इलाकों में भविष्य के यातायात दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

सीवेज के पानी का दोबारा इस्तेमाल करने पर जोर

बैठक में पेयजल की बढ़ती मांग और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट पर भी चर्चा हुई। कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि शहर में उत्पन्न होने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना और उसका दोबारा इस्तेमाल करना जरूरी है।

उन्होंने कोरमंगला-चल्लाघट्टा वैली (KC Valley), हेब्बल-नागवारा वैली (HN Valley) और वृशभावती वैली परियोजनाओं का उल्लेख किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से उपचारित अपशिष्ट जल को विभिन्न क्षेत्रों की झीलों तक पहुंचाया जाता है। इससे जलाशयों को भरने और भूजल स्तर में सुधार करने में मदद मिलती है।

मंत्री ने अधिकारियों से ऐसी परियोजनाओं का विस्तार करने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सीवेज ट्रीटमेंट एवं पुन: उपयोग की नई योजनाएं तैयार करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि शहर की जल सुरक्षा केवल नए जल स्रोत खोजने से नहीं, बल्कि उपलब्ध पानी के बेहतर प्रबंधन से भी मजबूत होगी।

सड़क खोदने वाली एजेंसियों की तय होगी जवाबदेही

बेंगलुरु में बार-बार सड़कों की खुदाई और मरम्मत के कारण वाहन चालकों तथा आम नागरिकों को होने वाली परेशानी का मुद्दा भी बैठक में उठा। मंत्री ने कहा कि कई बार विभिन्न सरकारी एजेंसियां सड़क की खुदाई करती हैं, लेकिन सड़क खराब होने पर इसकी जिम्मेदारी नगर निगमों पर डाल दी जाती है।

उन्होंने निर्देश दिया कि जो भी विभाग या एजेंसी सड़क की खुदाई करेगी, उसे काम पूरा होने के बाद सड़क को निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार पहले जैसी स्थिति में बहाल करने की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी।

इसके लिए सभी विभागों और एजेंसियों पर लागू होने वाली एक समान नीति तथा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी। इसमें सड़क की मरम्मत के मानक, जिम्मेदारियों का निर्धारण, मरम्मत की लागत की वसूली और नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान शामिल होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य बार-बार सड़कें खोदने और खराब मरम्मत के कारण पैदा होने वाली समस्याओं को रोकना है।

मेट्रो यात्रियों को मिलेगी फीडर बसों की सुविधा

बैठक में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने बेंगलुरु मेट्रो स्टेशनों के आसपास बेहतर फीडर बस नेटवर्क विकसित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (BMTC) को मेट्रो स्टेशनों के दो से तीन किलोमीटर के दायरे में GPS आधारित फीडर बस सेवाएं शुरू करने को कहा। इन बसों के लिए निश्चित मार्ग निर्धारित किए जाएंगे, ताकि यात्रियों को मनमाने तरीके से रूट बदलने की समस्या का सामना न करना पड़े।

विशेष रूप से आउटर रिंग रोड के आसपास मेट्रो की पहुंच बढ़ाने और यात्रियों को स्टेशन तक आसानी से पहुंचाने पर जोर दिया गया। इससे मेट्रो और बस सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने BMTC 2.0 मोबाइल एप का भी उल्लेख किया। इस एप के जरिए यात्री मेट्रो और BMTC बसों के टिकट एक ही प्लेटफॉर्म पर बुक कर सकते हैं। भविष्य में निजी ऑटो रिक्शा और टैक्सी सेवाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है।

नौ नए फायर स्टेशन खोलने की मंजूरी

शहर की बढ़ती आबादी और आपातकालीन सेवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैठक में अग्निशमन व्यवस्था मजबूत करने का भी फैसला लिया गया। GBA के अंतर्गत आने वाले पांच नगर निगमों में नौ अतिरिक्त फायर स्टेशन स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।

इनके स्थापित होने के बाद क्षेत्र में फायर स्टेशनों की कुल संख्या 29 हो जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आवासीय, व्यावसायिक और अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर उनका नक्शा तैयार करें।

इसी आधार पर भविष्य में अतिरिक्त फायर स्टेशनों की जरूरत का आकलन करते हुए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। तेजी से बढ़ती इमारतों और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच आग लगने या अन्य आपातकालीन घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बेंगलुरु के भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेगी योजना

शुक्रवार की बैठक में पेयजल, सड़क, भूमिगत सीवेज, सार्वजनिक परिवहन और अग्निशमन सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर एक साथ चर्चा हुई। इसका उद्देश्य शहर के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और बुनियादी सुविधाओं के विकास को आबादी के विस्तार के अनुरूप बनाना है।

बेंगलुरु में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण यातायात जाम, जल निकासी, पेयजल आपूर्ति और खराब सड़कों जैसी समस्याएं लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में पूरे शहरी जिले के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की पहल महत्वपूर्ण है।

हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न विभाग कितनी तेजी से अपनी परियोजनाएं तैयार करते हैं और निर्धारित समयसीमा के भीतर उन्हें जमीन पर उतार पाते हैं।

कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार अब बेंगलुरु के विकास को केवल मौजूदा शहर की सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय पूरे शहरी जिले को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। आने वाले वर्षों में इस योजना के तहत पानी, सड़क, सीवेज और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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