मांड्या। कर्नाटक के मांड्या जिले में शनिवार को उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के दौरे के दौरान किसानों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्नाटक राज्य रैथा संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान सर एम. विश्वेश्वरैया की प्रतिमा के पास एकत्र हुए और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने डीके शिवकुमार को काले झंडे दिखाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बस से दूसरे स्थान पर पहुंचाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को डीके शिवकुमार के मांड्या दौरे की जानकारी मिलने के बाद किसान संगठन के सदस्य अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे। किसानों ने सरकारी स्कूलों के संरक्षण, समान शिक्षा प्रणाली लागू करने और गन्ने के लिए उचित समर्थन मूल्य निर्धारित करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसानों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
कर्नाटक राज्य रैथा संघ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लेकर विरोध दर्ज कराया और डीके शिवकुमार के दौरे के दौरान अपनी नाराजगी जाहिर करने का प्रयास किया। किसानों के विरोध को देखते हुए मौके पर पुलिस की सक्रियता बढ़ गई।
जिला पुलिस अधीक्षक शोभा रानी स्वयं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं और किसानों से बातचीत करने की कोशिश की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। हालांकि, किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने काले झंडे लेकर विरोध कर रहे कई किसानों को हिरासत में ले लिया।
पुलिसकर्मियों ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को एक बस में बैठाया और मौके से ले गए। इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए किसानों की कुल संख्या और उन्हें कहां ले जाया गया, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
किसानों के विरोध प्रदर्शन में शिक्षा और कृषि से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी स्कूलों के संरक्षण की मांग करते हुए राज्य में सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि सरकारी स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
किसानों ने समान शिक्षा प्रणाली की मांग भी उठाई। शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर उपलब्ध कराने का मुद्दा लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाएं शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सरकार सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दे।
इसके अतिरिक्त गन्ने के उचित समर्थन मूल्य का मुद्दा भी विरोध प्रदर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। मांड्या जिला कर्नाटक के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में शामिल है, जहां गन्ने की खेती किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई है। गन्ने की कीमत और उत्पादन लागत के बीच संतुलन किसानों के लिए आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।
किसानों का कहना है कि खेती में लगने वाले खर्च को देखते हुए गन्ने का उचित मूल्य मिलना आवश्यक है। बीज, उर्वरक, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन जैसे खर्च किसानों की कुल उत्पादन लागत को प्रभावित करते हैं। ऐसे में गन्ने के मूल्य को लेकर किसान संगठनों की मांगें लगातार सामने आती रही हैं।
इस बीच डीके शिवकुमार हेलीकॉप्टर से मांड्या के पीईटी मैदान पहुंचे। उनके साथ मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी भी मौजूद थे। जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों और स्थानीय विधायकों ने उनका स्वागत किया। बाद में पीईएस कॉलेज परिसर में उन्होंने किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से ज्ञापन प्राप्त किए तथा उनकी समस्याएं सुनीं।
मांड्या दौरे के दौरान डीके शिवकुमार ने कावेरी नदी और मेकेदातु परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, परियोजना से कठिन परिस्थितियों में पानी का भंडारण करने में मदद मिलेगी। उन्होंने परियोजना से संबंधित भूमि और अन्य प्रक्रियाओं पर भी सरकार का पक्ष रखा।
दूसरी ओर, गन्ने के मूल्य को लेकर कर्नाटक के अन्य जिलों में भी किसानों का आंदोलन जारी है। किसान संगठन गन्ने के लिए 5,500 रुपये प्रति टन मूल्य की मांग कर रहे हैं। शनिवार को बेलगावी, धारवाड़ और अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन हुए। कुछ क्षेत्रों में किसानों ने सड़क मार्गों पर विरोध जताया, जिसके बाद प्रशासन ने यातायात और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए।
मांड्या में किसानों का विरोध प्रदर्शन इस व्यापक आंदोलन के बीच सामने आया है। यहां किसानों ने गन्ने की कीमत के साथ सरकारी स्कूलों और समान शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई के बाद अब उनकी मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल किसानों की हिरासत की घटना ने मांड्या में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। किसान संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों की शिकायतों का समाधान करने की चुनौती है।