कर्नाटक : मांड्या जिला जेल में विचाराधीन कैदी को कथित तौर पर विशेष सुविधाएं दिए जाने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जेल अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मांड्या जेल की सुपरिटेंडेंट एम. शांतम्मा को ड्यूटी में लापरवाही के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई उस समय हुई है जब जेल के करीब 80 कैदियों द्वारा हस्ताक्षर की गई एक शिकायत सामने आई है। इस शिकायत में जेल के अंदर कथित तौर पर अलग-अलग सुविधाएं उपलब्ध कराने के बदले पैसे वसूले जाने का आरोप लगाया गया है।

कैदियों की शिकायत के बाद बढ़ा मामला

जानकारी के अनुसार, मांड्या जेल के लगभग 80 कैदियों ने एक याचिका तैयार कर अधिकारियों को भेजी थी। इस याचिका में जेल के अंदर कथित रूप से दी जाने वाली सुविधाओं और उनके लिए तय रकम का विवरण होने का दावा किया गया है।

बताया जा रहा है कि शिकायत पर कैदियों के हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और विचाराधीन कैदियों (UTP) के नंबर भी दर्ज थे।

याचिका में आरोप लगाया गया कि जेल में कुछ विशेष सुविधाओं के लिए अलग-अलग शुल्क लिया जाता था और कुछ खास सेल से जुड़े मासिक भुगतान का भी उल्लेख किया गया था।

विचाराधीन कैदी को VIP सुविधा देने का आरोप

मामले की शुरुआत एक विचाराधीन कैदी को कथित तौर पर जेल में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के आरोपों से हुई।

आरोप है कि जेल में नियमों के विपरीत कुछ सुविधाएं दी गईं, जिसके बाद जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे।

हालांकि, पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोप कितने सही हैं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

जेल महानिदेशक ने दी जानकारी

कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (जेल) आलोक कुमार ने बताया कि एम. शांतम्मा के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही के चलते कार्रवाई की गई है।

उन्होंने कहा कि शांतम्मा का तबादला बेल्लारी सेंट्रल जेल कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने इस मामले में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

जेल व्यवस्था पर उठे सवाल

मांड्या जेल मामले ने राज्य की जेल व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जेलों में कैदियों के साथ समान व्यवहार और नियमों के पालन को लेकर लगातार निगरानी की जाती है। ऐसे में अगर किसी कैदी को विशेष सुविधाएं मिलने के आरोप सामने आते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जेलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण और सख्त निगरानी जरूरी है।

शिकायत में बताए गए कथित भुगतान

मीडिया को भेजी गई शिकायत में कथित तौर पर अलग-अलग सुविधाओं के लिए तय दरों की सूची और कुछ विशेष सेल से जुड़े भुगतान का विवरण होने की बात कही गई है।

हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच कर रही हैं।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल एम. शांतम्मा के खिलाफ कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में हलचल है।

अधिकारियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जेल के अंदर कथित अनियमितताओं में किन लोगों की भूमिका रही।

अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

मांड्या जेल का यह मामला जेलों में प्रशासनिक पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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