बेंगलुरु : सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने पहली कक्षा से ही कंप्यूटर साइंस को एक विषय के रूप में शुरू करने की पहल की है। इसके लिए अब पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों के लिए विशेष टेक्स्टबुक भी जारी कर दी गई हैं।
स्कूल शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण विभाग (DSERT) ने छोटे बच्चों के लिए ‘डिजी एंट्री (डिजिटल प्रवेश)’ नाम से किताबें तैयार की हैं। इन पुस्तकों में बच्चों को कंप्यूटर की शुरुआती जानकारी के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स जैसे आधुनिक विषयों से परिचित कराया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों को शुरुआती उम्र से ही तकनीक की समझ देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पहली कक्षा से कंप्यूटर साइंस को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है, ताकि छात्र आगे चलकर डिजिटल दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
नई किताबों में बच्चों की उम्र और समझ के स्तर को ध्यान में रखते हुए पाठ तैयार किए गए हैं। इसमें कंप्यूटर के मूलभूत हिस्सों, डिजिटल उपकरणों के उपयोग, इंटरनेट की शुरुआती जानकारी और तकनीक से जुड़े आसान कॉन्सेप्ट को शामिल किया गया है।
इसके अलावा किताबों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसे विषयों को भी सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है। छोटे बच्चों के लिए इन विषयों को कहानियों, चित्रों और गतिविधियों के माध्यम से रोचक बनाया गया है, ताकि वे आसानी से सीख सकें।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल शिक्षा को केवल बड़े कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। बच्चों में तकनीकी समझ विकसित करने के लिए शुरुआती स्तर से ही उन्हें कंप्यूटर और डिजिटल दुनिया से जोड़ना जरूरी है।
‘डिजी एंट्री’ किताबों के माध्यम से छात्रों को रचनात्मक सोच, समस्या समाधान और तकनीकी कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। विभाग का उद्देश्य है कि छात्र केवल कंप्यूटर चलाना ही न सीखें, बल्कि तकनीक को समझें और उसका उपयोग रचनात्मक कार्यों के लिए कर सकें।
नई पाठ्यपुस्तकों को तैयार करते समय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में दिए गए डिजिटल शिक्षा पर जोर को भी ध्यान में रखा गया है। नीति में छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार कौशल आधारित शिक्षा देने की बात कही गई है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई को अन्य कक्षाओं तक भी विस्तार दिया जा सकता है। फिलहाल पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों के लिए यह पहल शुरू की गई है।
सरकारी स्कूलों में इस तरह की डिजिटल शिक्षा शुरू होने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक तकनीक से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे डिजिटल अंतर को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल किताबें जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए स्कूलों में कंप्यूटर लैब, इंटरनेट सुविधा और शिक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
शिक्षकों की भूमिका इस योजना में अहम मानी जा रही है। छोटे बच्चों को तकनीक समझाने के लिए शिक्षकों को नए तरीके अपनाने होंगे। विभाग की ओर से शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती स्तर पर बच्चों में तकनीकी रुचि विकसित की जाती है तो भविष्य में वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर साइंस की शुरुआत और नई किताबों का प्रकाशन शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी ज्ञान भी मिलेगा और वे भविष्य की जरूरतों के लिए अधिक तैयार हो सकेंगे।