बेंगलुरु। भारत की तकनीकी राजधानी बेंगलुरु में युवा छात्र और स्टार्टअप कंपनियां नई तकनीकों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही हैं। न्यूटन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र अपनी कक्षाओं में सीखी गई तकनीकी जानकारी को वास्तविक परियोजनाओं में बदल रहे हैं। यहां छात्र अत्याधुनिक ड्रोन, छोटे आकार के रोवर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कोडिंग टूल विकसित कर रहे हैं। वहीं, बेंगलुरु का स्टार्टअप ड्रीमफ्लाई इनोवेशन ड्रोन और इलेक्ट्रिक एविएशन के लिए विशेष बैटरी तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।इन प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि नई पीढ़ी केवल तकनीक सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका उपयोग व्यावहारिक समस्याओं को हल करने के लिए भी कर रही है।
छात्रों ने तैयार किया आधुनिक क्वाडकॉप्टर ड्रोन
न्यूटन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी में छात्र एक विशेष क्वाडकॉप्टर ड्रोन विकसित कर रहे हैं। इस ड्रोन में फ्लाइट कंट्रोलर और कंपैनियन कंप्यूटर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।फ्लाइट कंट्रोलर ड्रोन की उड़ान को नियंत्रित करने का काम करता है। यह ड्रोन को संतुलित रखने, उसकी दिशा निर्धारित करने और उड़ान के दौरान स्थिरता बनाए रखने में सहायता करता है।वहीं, कंपैनियन कंप्यूटर कैमरे से प्राप्त तस्वीरों को प्रोसेस करता है। इसका उद्देश्य ड्रोन की स्थिति और उसकी गतिविधियों का पता लगाने में मदद करना है।इस तकनीक से भविष्य में ड्रोन को आसपास के वातावरण की जानकारी के आधार पर अधिक स्वचालित तरीके से संचालित करने की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
छोटे रोवर के जरिए रोबोटिक्स में नवाचार
ड्रोन के अलावा छात्र एक कॉम्पैक्ट रोवर पर भी काम कर रहे हैं। रोवर एक छोटा रोबोटिक वाहन होता है, जिसे जमीन पर अलग-अलग कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।ऐसी परियोजनाएं छात्रों को मैकेनिकल डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग की व्यावहारिक जानकारी देती हैं।रोवर तकनीक का इस्तेमाल अनुसंधान, निगरानी, औद्योगिक निरीक्षण और चुनौतीपूर्ण स्थानों पर जानकारी जुटाने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।छात्रों के लिए इस तरह की परियोजनाएं रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान करती हैं।
AI आधारित कोडिंग टूल भी बना रहे छात्र
न्यूटन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।छात्र ऐसे AI आधारित कोडिंग टूल पर काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य सॉफ्टवेयर विकसित करने की विभिन्न प्रक्रियाओं को एक ही ब्राउज़र में उपलब्ध कराना है।इससे प्रोग्रामिंग, कोड तैयार करने और डेवलपमेंट वर्कफ़्लो को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।संस्थान अपने तकनीकी पाठ्यक्रम में शुरुआती चरण से ही प्रोग्रामिंग, AI और व्यावहारिक परियोजनाओं पर जोर देता है। इसके तहत छात्रों को वास्तविक तकनीकी समस्याओं पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
ड्रोन के लिए खास बैटरी बना रहा बेंगलुरु का स्टार्टअप
इसी बीच बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ड्रीमफ्लाई इनोवेशन ड्रोन और इलेक्ट्रिक एविएशन के लिए जरूरत के अनुसार बैटरी विकसित करने पर काम कर रहा है।ड्रोन तकनीक में बैटरी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बैटरी की क्षमता, वजन और ऊर्जा आपूर्ति सीधे तौर पर ड्रोन की उड़ान अवधि तथा प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं।अलग-अलग ड्रोन की ऊर्जा संबंधी जरूरतें भी अलग होती हैं। ऐसे में विशेष उपयोग के लिए डिजाइन किए गए बैटरी सिस्टम उनकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।ड्रीमफ्लाई इनोवेशन का ध्यान ऐसी बैटरी तैयार करने पर है, जिन्हें विभिन्न ड्रोन और इलेक्ट्रिक विमानन अनुप्रयोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा सके।
इलेक्ट्रिक एविएशन में बैटरी तकनीक क्यों महत्वपूर्ण?
दुनियाभर में इलेक्ट्रिक विमानन और मानव रहित हवाई वाहनों के क्षेत्र में नई तकनीकों पर काम किया जा रहा है।इन वाहनों के लिए हल्की, सुरक्षित और अधिक ऊर्जा संग्रहित करने वाली बैटरियां विकसित करना महत्वपूर्ण चुनौती है।बैटरी का वजन अधिक होने से ड्रोन की उड़ान क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, ऊर्जा क्षमता सीमित होने पर उसकी उड़ान अवधि कम हो सकती है।ऐसे में बेहतर बैटरी प्रबंधन और डिजाइन से इलेक्ट्रिक एविएशन के विकास में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
क्लासरूम से निकलकर वास्तविक दुनिया तक पहुंच रहा इनोवेशन
बेंगलुरु में छात्रों और स्टार्टअप कंपनियों के ये प्रयास तकनीकी शिक्षा तथा उद्योग के बीच बढ़ते संबंधों को दर्शाते हैं।न्यूटन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र ड्रोन, रोवर और AI टूल जैसी परियोजनाओं के जरिए व्यावहारिक अनुभव हासिल कर रहे हैं। दूसरी ओर, ड्रीमफ्लाई इनोवेशन जैसे स्टार्टअप उभरते उद्योगों की तकनीकी जरूरतों का समाधान तलाश रहे हैं।इन परियोजनाओं के विकास, परीक्षण और वास्तविक उपयोग में सफलता के आधार पर भविष्य में कृषि, औद्योगिक निरीक्षण, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक विमानन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।