बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा के दोनों सदनों में शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन गतिरोध जारी रहा। वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले के आरोपी योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी भाजपा ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विधानसभा और विधान परिषद, दोनों जगह विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही प्रभावित हुई। हालांकि, विधान परिषद के सभापति सलीम अहमद ने उम्मीद जताई कि सोमवार को फ्लोर लीडर्स की बैठक के बाद इस राजनीतिक गतिरोध को खत्म करने का रास्ता निकल सकता है।

विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले में मंत्री बी. नागेंद्र की जिम्मेदारी तय की जाए और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जाए। भाजपा का कहना है कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। इसी मांग को लेकर विपक्ष पिछले पांच दिनों से सदन के भीतर और बाहर सरकार पर दबाव बना रहा है।

प्रश्नकाल में व्यवधान पर सभापति नाराज

लगातार हो रहे हंगामे को लेकर विधान परिषद के सभापति सलीम अहमद ने शुक्रवार को नाराजगी जताई। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा कि उन्हें मंत्री से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए। अहमद के अनुसार, विपक्षी नेताओं से उन्होंने आग्रह किया था कि वे आवश्यक नोटिस दें और बी. नागेंद्र से जुड़े मामले पर सदन में चर्चा कराएं।

सभापति ने विशेष रूप से प्रश्नकाल के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान व्यवधान न डालने की लंबे समय से परंपरा रही है, क्योंकि यही वह समय होता है जब विधायक सरकार से सीधे सवाल पूछकर अपने क्षेत्रों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जवाब हासिल कर सकते हैं।

अहमद ने कहा कि उन्होंने विपक्षी नेताओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन भाजपा उनकी अपील मानने को तैयार नहीं हुई। विपक्ष ने मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखा और सदन की कार्यवाही पर इसका असर पड़ा।

भारी खर्च का दिया हवाला

लगातार हंगामे के बावजूद सभापति सलीम अहमद ने कहा कि उन्होंने दिन का एजेंडा पूरा कराने की कोशिश की। उन्होंने इसके पीछे विधानसभा सत्र पर होने वाले भारी सरकारी खर्च का हवाला दिया। उनका कहना था कि सरकार विधानमंडल का सत्र आयोजित करने पर बड़ी राशि खर्च करती है, इसलिए उपलब्ध समय का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।

सभापति का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच लगातार टकराव के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विधायी कार्य को पूरी तरह ठप नहीं होने दिया जाना चाहिए।

सोमवार को फ्लोर लीडर्स की बैठक

सलीम अहमद ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोमवार को फ्लोर लीडर्स की बैठक में इस गतिरोध का कोई समाधान निकल सकता है। इस बैठक में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के प्रमुख नेता शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में बी. नागेंद्र के मुद्दे पर चर्चा की प्रक्रिया और सदन के सुचारु संचालन को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

फ्लोर लीडर्स की बैठक को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पांच दिनों से चले आ रहे विरोध के कारण सदन की कार्यवाही पर असर पड़ा है। यदि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं तो विपक्ष को मंत्री के मुद्दे पर चर्चा का अवसर मिल सकता है और सरकार भी विधायी कामकाज को बिना लगातार व्यवधान के आगे बढ़ा सकती है।

विपक्ष अपनी मांग पर अडिग

हालांकि, भाजपा ने अभी तक मंत्री के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन से जुड़े कथित घोटाले में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। भाजपा नेताओं का कहना है कि केवल चर्चा की अनुमति देना पर्याप्त नहीं है और मंत्री को पद से हटाना जरूरी है।

विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी, प्लेकार्ड और अन्य संसदीय विरोध के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। विधानसभा के बाहर भी भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार मंत्री के इस्तीफे पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती।

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ कांग्रेस सदन का कामकाज आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। सरकार का रुख है कि विपक्ष को अपनी मांग रखने के लिए संसदीय नियमों के तहत चर्चा करनी चाहिए और लगातार हंगामा करके कार्यवाही बाधित नहीं करनी चाहिए।

सदन की कार्यवाही बनाम राजनीतिक विरोध

मौजूदा गतिरोध ने कर्नाटक विधानमंडल में राजनीतिक विरोध और सदन की कार्यवाही के बीच संतुलन को लेकर भी बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि गंभीर आरोपों के मामले में सदन के भीतर सरकार से जवाब मांगना उसका लोकतांत्रिक अधिकार है। वहीं, सभापति और सत्तापक्ष का जोर इस बात पर है कि विरोध के बावजूद प्रश्नकाल और अन्य निर्धारित कार्यवाही को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

सलीम अहमद का यह कहना कि प्रश्नकाल विधायकों के लिए सरकार से जवाब हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसी व्यापक चिंता को दर्शाता है। उनके अनुसार, यदि प्रश्नकाल ही लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता है तो इससे उन विधायकों के अधिकार प्रभावित होते हैं जो अपने क्षेत्र से जुड़े सवाल उठाना चाहते हैं।

आगे क्या होगा?

शुक्रवार को गतिरोध के पांचवें दिन भी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। अब सोमवार को होने वाली फ्लोर लीडर्स की बैठक पर सबकी नजर है। इस बैठक में यदि विपक्ष को बी. नागेंद्र के मुद्दे पर चर्चा का आश्वासन मिलता है और सदन की कार्यवाही के नियमों को लेकर सहमति बनती है, तो गतिरोध खत्म हो सकता है।

लेकिन यदि भाजपा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी रहती है और सरकार इसे स्वीकार नहीं करती, तो अगले सप्ताह भी सदन में हंगामा जारी रहने की संभावना है। ऐसे में मॉनसून सत्र का महत्वपूर्ण समय राजनीतिक टकराव में बीत सकता है।

फिलहाल सभापति सलीम अहमद की अपील और सोमवार की प्रस्तावित बैठक गतिरोध खत्म करने की सबसे बड़ी उम्मीद बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख में कितनी नरमी दिखाते हैं और क्या बी. नागेंद्र के मुद्दे पर चर्चा के लिए कोई स्वीकार्य रास्ता निकाला जा सकता है।

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