Karnataka कर्नाटक: कस्बे के नेताजी सुभाष चंद्र बोस गवर्नमेंट हाई स्कूल की छात्रा वी. आरिका के SSLC परीक्षा परिणाम में गंभीर गलती सामने आई है। परीक्षा बोर्ड द्वारा साइंस विषय में उसके अंक गलत दर्ज कर दिए गए। पहले जारी परिणाम में आरिका को 58 में से केवल 17 अंक दिए गए थे। लेकिन जब छात्रा को अपनी उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी मिली, तो इस गलती का खुलासा हुआ।
जांच में पता चला कि यह अंतर मूल्यांकनकर्ता (इवैल्यूएटर) की लापरवाही के कारण हुआ है, जिससे 41 अंकों का बड़ा फर्क आया। मामले के सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन और बोर्ड स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हेडमास्टर मंजूनाथ ने कहा कि यदि संशोधित मूल्यांकन सही पाया जाता है, तो छात्रा के कुल अंक बढ़कर 538 तक पहुंच सकते हैं। इस गलती के बाद छात्रा को पुनर्मूल्यांकन (रीवैल्यूएशन) के लिए आवेदन करना होगा और निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा।
यह मामला सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों और छात्रों में भी इस तरह की गलतियों को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि इससे छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
इसी तरह का एक और मामला विजयपुरा जिले के बिज्जरगी गांव से सामने आया है। यहां मणिकेश्वरी हाई स्कूल की छात्रा श्रेया मादेवा चौधरी के SSLC अंग्रेजी विषय में पहले केवल 6 अंक दिखाए गए थे। लेकिन उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी मिलने के बाद पता चला कि उसे वास्तव में 64 अंक मिले हैं। इस तरह 58 अंकों का अंतर सामने आया, जिसने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोनों मामलों के बाद शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वह मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता और सख्ती सुनिश्चित करे। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिणामों की जांच सावधानीपूर्वक करें और किसी भी विसंगति की स्थिति में तुरंत बोर्ड से संपर्क करें। इन घटनाओं ने एक बार फिर परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस शुरू कर दी है।