पश्चिमी घाट को ESA घोषित करने के मुद्दे पर कर्नाटक में विशेष सत्र, सरकार रखेगी अपना पक्ष
बेंगलुरु। पश्चिमी घाट को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Area-ESA) घोषित करने के केंद्र सरकार के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को लेकर कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार को घोषणा की कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए विधानसभा में विस्तृत चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पश्चिमी घाट को ESA घोषित करने का प्रस्ताव के. कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पर आधारित है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किए हैं, जिसमें पश्चिमी घाट के कई क्षेत्रों को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील घोषित करने की बात कही गई है।
डी.के. शिवकुमार ने बताया कि केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन में कर्नाटक के 10 जिलों के 33 तालुकों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार को अपनी आपत्तियां और सुझाव केंद्र के सामने रखने हैं। इसके लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लेना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी घाट क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन वहां रहने वाले लोगों के हितों का भी ध्यान रखना जरूरी है। सरकार पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करेगी।
पश्चिमी घाट भारत के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता वाले क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र कई दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का घर है। पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से पश्चिमी घाट के संरक्षण की मांग करते रहे हैं।
हालांकि, पश्चिमी घाट को ESA घोषित करने के प्रस्ताव को लेकर कई राज्यों और स्थानीय लोगों में चिंता भी जताई जाती रही है। लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का असर खेती, निर्माण और स्थानीय विकास गतिविधियों पर पड़ सकता है।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की समस्याओं को समझना जरूरी है। विधानसभा के विशेष सत्र में इन सभी मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में सभी पक्षों से बातचीत करेगी। इसमें जनप्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की राय को भी ध्यान में रखा जाएगा।
कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट में पश्चिमी घाट के संरक्षण को लेकर कई सुझाव दिए गए थे। रिपोर्ट में पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान कर वहां कुछ गतिविधियों को नियंत्रित करने की सिफारिश की गई थी।
केंद्र सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के बाद अब राज्यों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। कर्नाटक सरकार इसी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष तैयार कर रही है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा कर्नाटक में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिमी घाट से जुड़े जिलों में बड़ी संख्या में लोग खेती और अन्य स्थानीय गतिविधियों पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार पर पर्यावरण और जनहित दोनों के बीच संतुलन बनाने का दबाव है।
विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर सभी दलों के विधायक अपनी राय रख सकते हैं। सरकार की कोशिश होगी कि राज्य का पक्ष मजबूत तरीके से केंद्र के सामने रखा जाए।
फिलहाल पश्चिमी घाट को ESA घोषित करने का मामला केंद्र और राज्य सरकारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब नजर इस बात पर होगी कि विधानसभा की चर्चा के बाद कर्नाटक सरकार केंद्र को क्या सुझाव देती है और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।