SIR विवाद पर प्रियांक खड़गे का बयान, कहा– नियम आयोग के हैं, जवाब भी वही दे

Update: 2026-07-04 08:25 GMT

Karnataka कर्नाटक: गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने विपक्ष की ओर से लगाए गए SIR (Special Investigation/Registration Related) प्रक्रिया में कमियों के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कानून से बाहर जाकर कोई भी काम नहीं कर सकता और इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर कोई कमी पाई जाती है तो उस पर कार्रवाई करने का अधिकार भी आयोग के पास ही है।

प्रियांक खड़गे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार की ओर से किसी भी व्यक्ति को SIR जमा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के दायरे में आती है और नियम बनाने तथा उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी भी आयोग की ही है।

उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर कहा कि कई तरह की गलतफहमियां फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार का इस प्रक्रिया के संचालन में सीमित रोल है। उन्होंने दोहराया कि नियमों के अनुसार पूरी व्यवस्था चुनाव आयोग द्वारा नियंत्रित की जाती है।



गृह मंत्री ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर कुछ लोगों में असमंजस और चिंता की स्थिति जरूर बनी हुई है, लेकिन इसके लिए स्पष्टता देना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में केवल सहयोगी भूमिका निभाती है, जबकि वास्तविक प्रक्रिया आयोग द्वारा संचालित होती है।

उन्होंने बताया कि SIR को लेकर 12 सवाल पहले ही चुनाव आयोग से पूछे गए हैं, लेकिन अब तक इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। खड़गे ने कहा कि जब जनता में किसी प्रक्रिया को लेकर भ्रम या चिंता होती है, तो संबंधित संस्था को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।

प्रियांक खड़गे ने आगे कहा कि SIR किसी बंद कमरे या किसी निजी कार्यालय में नहीं किया गया है, बल्कि यह एक निर्धारित और निगरानी में चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि यदि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी या कमी सामने आती है तो उस पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी भी चुनाव आयोग की ही होती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रक्रियाएं संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही पूरी हों। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अनावश्यक रूप से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पूरा सिस्टम नियमों के अनुसार काम करता है।

गृह मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना तथ्यों के आरोप लगाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को प्रक्रिया पर आपत्ति है तो उसे औपचारिक रूप से आयोग के सामने रखा जाना चाहिए, न कि जनता के बीच भ्रम पैदा किया जाना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और उसे ही इस तरह के मामलों में स्पष्टीकरण देना चाहिए। सरकार की भूमिका केवल सहयोग और समन्वय तक सीमित है।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर SIR प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार और निगरानी में चल रही हैं।

कुल मिलाकर प्रियांक खड़गे के इस बयान ने SIR विवाद को और चर्चा में ला दिया है, जहां एक तरफ पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार इसे चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का विषय बता रही है।

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