बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शिक्षा नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हाईकमान के निर्देश के अनुसार कांग्रेस शासित राज्यों में नई युवा पीढ़ी की जरूरतों और विचारों को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को रोजगार हासिल करने तक सीमित रखने के बजाय युवाओं को उद्यमी और रोजगार देने वाला बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शिवकुमार सोमवार को बेंगलुरु ग्रामीण जिले के देवनहल्ली औद्योगिक क्षेत्र में 'रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट' के उद्घाटन और 'नारायण इंस्टीट्यूट' की आधारशिला रखने के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार करना जरूरी है। बदलती तकनीक, उद्योगों की जरूरतों और युवाओं की आकांक्षाओं को देखते हुए ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित होनी चाहिए, जो छात्रों को केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित न रखे।

कांग्रेस शासित राज्यों में नई शिक्षा नीति की तैयारी

डी.के. शिवकुमार ने कहा, "कांग्रेस पार्टी के हाईकमान के निर्देशानुसार हम नई युवा पीढ़ी की जरूरतों और विचारों के आधार पर कांग्रेस शासित राज्यों में एक नई शिक्षा नीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।"

उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि कांग्रेस शासित राज्यों में शिक्षा नीति को लेकर आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़ने पर विचार किया जा रहा है। शिवकुमार ने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दिल्ली में कांग्रेस शासित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक भी तय की गई थी।

हालांकि उन्होंने कहा कि यह बैठक आखिरी समय में रद्द कर दी गई। बैठक की नई तारीख को लेकर उन्होंने अपने संबोधन में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

नौकरी मांगने वाले नहीं नौकरी देने वाले बनें छात्र

शिवकुमार ने युवाओं और छात्रों को लेकर कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। छात्रों को नौकरी चाहने वाले के बजाय नौकरी देने वाले यानी उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने शिक्षा संस्थानों से भी युवाओं में उद्यमिता, नवाचार और नेतृत्व की क्षमता विकसित करने पर ध्यान देने की बात कही। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में नए कारोबार और स्टार्टअप रोजगार पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

उनका कहना था कि नई पीढ़ी को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वह नए अवसरों की तलाश करने के साथ खुद भी अवसर पैदा कर सके। इसके लिए शिक्षा को उद्योगों और आधुनिक तकनीक की जरूरतों के साथ जोड़ना महत्वपूर्ण है।

80 से ज्यादा विदेशी विश्वविद्यालयों का किया जिक्र

डी.के. शिवकुमार ने अपने संबोधन में दावा किया कि दुनिया भर के 80 से ज्यादा प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय कर्नाटक से छात्रों को चुनने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

उन्होंने इसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था और यहां मौजूद प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में प्रस्तुत किया। कर्नाटक, विशेष रूप से बेंगलुरु, लंबे समय से तकनीकी शिक्षा, आईटी, स्टार्टअप और अनुसंधान के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है।

शिवकुमार ने कहा कि राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों को गुणवत्ता, अनुसंधान और उद्योगों के साथ सहयोग पर विशेष ध्यान देना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात का भी किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई अपनी हालिया मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मैसूर में प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्होंने भारत के विकास में बेंगलुरु और कर्नाटक की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी थी।

शिवकुमार के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा था कि अगर भारत को आगे बढ़ाना है तो बेंगलुरु और कर्नाटक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

उनका यह बयान राज्य की तकनीकी, औद्योगिक और आर्थिक ताकत को रेखांकित करने वाला था। बेंगलुरु देश के प्रमुख आईटी और स्टार्टअप केंद्रों में शामिल है तथा यहां बड़ी संख्या में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां काम करती हैं।

देवनहल्ली के बढ़ते महत्व पर फोकस

जिस देवनहल्ली औद्योगिक क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित किया गया, वह बेंगलुरु के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल है। यहां औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के साथ शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों की भूमिका भी बढ़ रही है।

रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट के उद्घाटन और नारायण इंस्टीट्यूट की आधारशिला को क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।

शिवकुमार ने शिक्षा संस्थानों से ऐसे पाठ्यक्रम और वातावरण विकसित करने की अपेक्षा जताई, जो छात्रों को बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप कौशल प्रदान कर सकें।

शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल पर जोर

कर्नाटक में आईटी, बायोटेक, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है।

शिवकुमार के बयान में भी युवाओं को उद्यमिता की ओर ले जाने पर खास जोर दिखाई दिया। उनका कहना था कि भविष्य की शिक्षा नीति में नई पीढ़ी के विचारों और जरूरतों को प्रमुख स्थान मिलना चाहिए।

नई शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस शासित राज्यों के बीच होने वाली संभावित चर्चा पर अब नजर रहेगी। दिल्ली में प्रस्तावित बैठक रद्द होने के बाद यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस संबंध में अगली बैठक कब होगी और नई नीति का स्वरूप क्या होगा।

फिलहाल डी.के. शिवकुमार के बयान ने कांग्रेस शासित राज्यों में शिक्षा नीति को लेकर नई पहल के संकेत दिए हैं। साथ ही उन्होंने कर्नाटक को शिक्षा, उद्यमिता, निवेश और वैश्विक अवसरों के प्रमुख केंद्र के रूप में आगे बढ़ाने की बात दोहराई है।

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