कर्नाटक में PRC नोटिफिकेशन पर सियासी घमासान, BJP ने राज्यपाल से वापस लेने की मांग की

Update: 2026-07-15 10:58 GMT

कर्नाटक : परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट (PRC) जारी करने को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर राज्य सरकार की ओर से जारी PRC नोटिफिकेशन को तत्काल वापस लेने की मांग की।

BJP ने राज्य सरकार के इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे राज्य के हितों, देश के संघीय ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर असर पड़ सकता है। पार्टी का आरोप है कि PRC जारी करने की प्रक्रिया को लेकर सरकार का फैसला कई सवाल खड़े करता है और इसकी समीक्षा जरूरी है।

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर रोक लगाई जाए और इस मामले में उचित कदम उठाए जाएं। BJP नेताओं का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक चर्चा और जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घोषणा की थी कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में मदद के लिए पात्र नागरिकों को परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद राज्य के राजस्व विभाग ने PRC जारी करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। इन दिशा-निर्देशों में कहा गया कि यह प्रमाण पत्र कर्नाटक में स्थायी निवास के दस्तावेज के रूप में माना जाएगा।

सरकार का तर्क है कि PRC प्रक्रिया से पात्र नागरिकों को अपनी स्थायी निवास स्थिति साबित करने में मदद मिलेगी। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आसानी आएगी और दस्तावेजों से जुड़े कामों को व्यवस्थित किया जा सकेगा।

हालांकि, भाजपा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। पार्टी ने आशंका जताई कि इसका इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा सकता है।

BJP नेताओं ने कहा कि कर्नाटक जैसे सीमावर्ती और महत्वपूर्ण राज्य में ऐसे फैसलों को लागू करने से पहले सुरक्षा और सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। पार्टी ने राज्य सरकार से पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की है।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि PRC जारी करने का उद्देश्य केवल प्रशासनिक सुविधा और योग्य नागरिकों को दस्तावेज उपलब्ध कराना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए तय नियमों और पात्रता मानकों का पालन किया जाएगा।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, PRC का मुद्दा आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। राज्य में पहले से ही कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद चल रहे हैं, ऐसे में यह विवाद दोनों पक्षों के बीच टकराव को और बढ़ा सकता है।

BJP ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि सरकार के फैसले की समीक्षा जरूरी है। पार्टी का कहना है कि राज्य के हितों और संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस नोटिफिकेशन को वापस लिया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार अपने फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है। सरकार का कहना है कि PRC केवल स्थायी निवास से संबंधित दस्तावेज होगा और इसे तय नियमों के तहत ही जारी किया जाएगा।

फिलहाल मामला राज्यपाल के सामने पहुंच गया है और अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाया जाता है। कर्नाटक में PRC को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

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