मैसूर दशहरा में चार मंत्रियों को पुलिस ने रोका सीएम डीके शिवकुमार नाराज
बेंगलुरु। कर्नाटक के मैसूर में दशहरा समारोह के दौरान राज्य सरकार के चार मंत्रियों को कथित तौर पर पूजा स्थल में प्रवेश करने से रोकने का मामला तूल पकड़ गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि मंत्रियों को आधिकारिक कार्यक्रम में प्रवेश करने से रोकना स्वीकार्य नहीं है। इस घटना के बाद राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।यह घटना बुधवार, 21 अक्टूबर को मैसूर के ऐतिहासिक दशहरा समारोह के दौरान आयोजित नंदीध्वज पूजा के समय हुई। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ कई मंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर कुछ मंत्रियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद मौके पर विवाद की स्थिति बन गई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
चार मंत्रियों को प्रवेश नहीं देने पर विवाद
जानकारी के मुताबिक, जिन मंत्रियों को प्रवेश करने से रोका गया, उनमें शिवराज तंगदागी, पी.एम. नरेंद्र स्वामी, एच.सी. बालकृष्ण और के.एस. बसवंताप्पा के नाम सामने आए हैं।बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने के बाद उनके साथ चल रहे मंत्रियों को पुलिस अधिकारियों ने रोक दिया। मंत्रियों ने अधिकारियों को अपनी पहचान बताई और कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति होने की बात कही।इसके बावजूद कुछ समय तक उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया। इस दौरान मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस हुई। बाद में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई और मंत्रियों को कार्यक्रम स्थल की ओर जाने दिया गया।
पुलिस अधिकारी से हुई तीखी बहस
घटना के दौरान कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदागी ने उन्हें रोकने वाले पुलिस अधिकारी के सामने नाराजगी जाहिर की।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंत्री ने अधिकारी को बताया कि वह राज्य के संस्कृति मंत्री हैं और आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं।इस दौरान मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर प्रवेश की अनुमति नहीं होने का हवाला दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ देर तक बहस हुई।घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सीएम शिवकुमार ने जताई कड़ी नाराजगी
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त की।उन्होंने कहा कि नंदीध्वज पूजा जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम के दौरान मंत्रियों को प्रवेश करने से रोकना गंभीर मामला है।मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि मंत्रियों के प्रति ऐसा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने संबंधित अधिकारियों के आचरण की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।शिवकुमार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पूरे मामले की जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने का निर्देश दिया है।
जांच में तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब इस बात की जांच की जाएगी कि मंत्रियों को कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने से क्यों रोका गया।जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था के तहत क्या निर्देश दिए गए थे और प्रवेश संबंधी नियमों का पालन किस प्रकार किया गया।इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि घटना सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर हुई गलतफहमी का परिणाम थी या अधिकारियों की ओर से किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई।हालांकि, जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले संबंधित अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
मैसूर दशहरा में शामिल हुए कई गणमान्य अतिथि
मैसूर का दशहरा कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल है। हर वर्ष इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेते हैं।इस वर्ष भी मैसूर दशहरा समारोह में विभिन्न राज्यों के प्रमुख नेताओं और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी रही।21 अक्टूबर को मैसूर पैलेस के बलराम द्वार पर नंदीध्वज पूजा के साथ पारंपरिक जंबू सवारी शोभायात्रा की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस पूजा में हिस्सा लिया।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
इस घटना के बाद बड़े सरकारी आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के प्रवेश प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के आयोजनों में पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ आमंत्रित अतिथियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।फिलहाल मुख्यमंत्री द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।