बेंगलुरु: चिकमगलूर पुलिस ने राज्य की 'कॉफी राजधानी' में प्रवासी श्रमिकों के दस्तावेजों की जांच के लिए एक अनोखा और अपनी तरह का पहला पोर्टल तैयार किया है। इस जिले में हर साल औसतन तीन लाख प्रवासी श्रमिक आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल और असम से आने वाले लोगों की है।

चिकमगलूर के पुलिस अधीक्षक (SP) जितेंद्र कुमार दायमा ने 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, "हमने सभी कॉफी एस्टेट मालिकों से कहा है कि वे अपने मैनेजरों, कर्मचारियों और विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों के सरकारी दस्तावेज हमें उपलब्ध कराएं। हमने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की मदद से एक पोर्टल बनाया है, जिसके जरिए इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन किया जाता है।"

उन्होंने आगे कहा, "हम यह जांचते हैं कि उनका आधार कार्ड असली है या नहीं और क्या इसे कानूनी तरीके से हासिल किया गया है। हालांकि, अगर कोई आधार कार्ड अवैध तरीके से बनवाया गया है, तो उसकी पुष्टि करना हमारे लिए मुश्किल होता है; इसलिए हमने इस मामले में NIC से मदद मांगी है।"

"अगर कोई संदेह होता है, तो हम 'नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड' (Natgrid) और 'क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम' (CCTNS) का उपयोग करके प्रवासी श्रमिकों के पिछले रिकॉर्ड और उनके आपराधिक इतिहास की जांच करते हैं। यह पोर्टल जुलाई में तैयार किया गया था और अब तक हमने 2,400 प्रवासी श्रमिकों का डेटा इसमें दर्ज कर लिया है।"

SP ने बताया, "इसके आधार पर अगस्त में सात अवैध बांग्लादेशियों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन सभी के पास असली दिखने वाले आधार कार्ड थे। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में कुछ एजेंटों को 2,000 रुपये प्रति व्यक्ति देकर उन्होंने ये कार्ड बनवाए थे। उनके कार्ड पर दिए गए स्थानीय पते और माता-पिता के नाम गलत थे। ये कार्ड अवैध तरीके से हासिल किए गए थे।"

 

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