बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ना किसानों के लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शन और पेराई सत्र शुरू होने में आ रही बाधाओं के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने सोमवार, 19 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की लंबित मांगों का समाधान निकालने और राज्य में चीनी मिलों का पेराई सत्र सुचारु रूप से शुरू कराने के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में उत्तरी कर्नाटक के विभिन्न जिलों में चल रहे किसान आंदोलन का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिलने और अन्य समस्याओं को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलनकारी किसान अलग-अलग कस्बों से हुबली की ओर पदयात्रा कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव कर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
गन्ने की कीमत को लेकर किसानों में नाराजगी
कर्नाटक के गन्ना उत्पादक किसान लंबे समय से अपनी उपज के लिए बेहतर कीमत की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उन्हें गन्ने का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खाद, मजदूरी, सिंचाई और परिवहन खर्च बढ़ने से उनकी आर्थिक परेशानियां और गंभीर हो गई हैं।आंदोलनकारी किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन शामिल है। किसान संगठन चाहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करें, जिससे गन्ना उत्पादकों को उनकी लागत के अनुरूप लाभकारी कीमत मिल सके।
हुबली की ओर किसानों की पदयात्रा
उत्तरी कर्नाटक में किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान हुबली की ओर पदयात्रा कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव करने की योजना बनाई है।इस बीच कई स्थानों पर सड़क जाम और यातायात प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं। किसानों के प्रदर्शन के कारण प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।केंद्रीय मंत्री के आवास पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर उच्च न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन को एक ओर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी है।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का समय भी मांगा था, ताकि किसानों की समस्याओं और राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा की जा सके।मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह विपक्षी नेताओं सहित सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात करना चाहते हैं। उनका मानना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान सभी संबंधित पक्षों के बीच बातचीत से निकाला जाना चाहिए।
केंद्र ने किसानों की मांगों पर बनाई समिति
गन्ना किसानों की समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को एक समिति गठित की थी। इस समिति का नेतृत्व नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद को सौंपा गया है। समिति को कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना उत्पादकों की मांगों का अध्ययन करने तथा कीमतों से जुड़े मुद्दों पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित मुद्दों पर समिति के माध्यम से विचार किया जाएगा।
पेराई सत्र शुरू कराने पर सरकार का जोर
कर्नाटक में गन्ने का पेराई सत्र शुरू होने में देरी से किसानों और चीनी उद्योग दोनों की चिंताएं बढ़ रही हैं। समय पर पेराई नहीं होने से किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है। वहीं चीनी मिलों के संचालन और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।मुख्यमंत्री शिवकुमार ने किसानों, चीनी मिल संचालकों और सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत करने का भरोसा दिया है। उन्होंने दशहरा के बाद संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर गन्ने की कीमत और अन्य मांगों पर चर्चा करने की बात कही है।फिलहाल किसानों की नजर केंद्र और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है। आंदोलन का समाधान बातचीत से निकलता है या विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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