बेंगलुरु: शहर की एक सेशंस कोर्ट ने बुधवार को गृह मंत्री प्रियांक एम. खड़गे और कर्नाटक प्रदेश युवा कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद हारिस नलपाड को जारी समन के बाद होने वाली आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह समन RSS और उसके सदस्यों को सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए बदनाम करने के आरोप में RSS के एक सदस्य द्वारा दायर मानहानि की निजी शिकायत पर मजिस्ट्रेट ने जारी किया था।

मौजूदा और पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट के जज शिवप्रसाद केबी ने यह अंतरिम आदेश दिया। उन्होंने शहर की XLII ACJM कोर्ट (मौजूदा और पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के लिए) के उस आदेश पर आगे की कार्यवाही रोक दी, जिसमें मानहानि के अपराध का संज्ञान लेते हुए समन जारी किया गया था और शिकायतकर्ता के सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यह रोक सुनवाई की अगली तारीख, 30 अक्टूबर तक के लिए लगाई गई है।

27 जून को मजिस्ट्रेट ने खड़गे की दलील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया था। खड़गे ने तर्क दिया था कि RSS का कोई भी सदस्य मानहानि की शिकायत दायर करने का अधिकार (locus standi) नहीं रखता क्योंकि RSS कोई रजिस्टर्ड संगठन नहीं है और न ही उसने कोई रजिस्टर्ड सदस्यता सूची रखी है। सेशंस कोर्ट के सामने आरोपी-याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता, तेजस ए (जो RSS का सदस्य है), ने RSS के साथ अपने जुड़ाव के बारे में अलग-अलग बातें कही हैं और वह यह साबित करने के लिए कोई सबूत पेश करने में नाकाम रहा है कि वह RSS का सदस्य है। उसके द्वारा पेश की गई तस्वीरें शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए सर्टिफिकेट से मेल नहीं खातीं और वे RSS के साथ उसके जुड़ाव को साबित नहीं करतीं।

 यह तर्क देते हुए कि शिकायतकर्ता के पास मजिस्ट्रेट के सामने मानहानि के अपराध के लिए निजी शिकायत दायर करने का कोई अधिकार (locus standi) नहीं है, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि BNSS की धारा 356 के तहत दंडनीय अपराधों का संज्ञान लेने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश कानूनन सही नहीं है, क्योंकि पीड़ित व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत के अलावा इसका संज्ञान नहीं लिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता की योग्यता के मुद्दे पर फैसला किए बिना ही गैर-कानूनी तरीके से मामले का संज्ञान लिया और यह तय किया कि ऐसे मामले का फैसला ट्रायल के दौरान किया जाना चाहिए।

 

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