बेंगलुरु: कर्नाटक एक नई पॉलिसी के ज़रिए AI-आधारित निवेश को आकर्षित करने की तैयारी कर रहा है। इस पॉलिसी में पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्लोबल टेक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए दक्षता-आधारित इंसेंटिव (प्रोत्साहन) दिए जाएंगे।
IT/BT मंत्री प्रियांक खड़गे के अनुसार, राज्य सरकार भारत की पहली समर्पित 'सस्टेनेबल डेटा सेंटर पॉलिसी' शुरू करने की योजना बना रही है। इसका मकसद पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन करना और इस सेक्टर में संसाधनों की खपत को कम करना है। इस पॉलिसी का लक्ष्य 2031 तक 1 GW डेटा सेंटर क्षमता हासिल करना और भारत के AI-रेडी डेटा सेंटर मार्केट में 10-12% हिस्सेदारी पाना है। राज्य ने निवेश, ग्रीन एनर्जी को अपनाने, वर्कफोर्स को स्किल करने, R&D, कनेक्टिविटी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंसेंटिव देने के वास्ते 1,300.45 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। इसमें बिजली और पानी की दक्षता के मानकों के आधार पर सब्सिडी दी जाएगी।
इस फ्रेमवर्क में कई बातों पर ध्यान दिया जा रहा है: पहला, 'सस्टेनेबल डेटा सेंटर ज़ोन' बनाना; दूसरा, इस सेक्टर के लिए समर्पित 'सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' बनाना; तीसरा, बिजली और पानी की उपलब्धता के आधार पर साइट चुनने के लिए संसाधनों की 'हीट-मैपिंग' करना; चौथा, एज डेटा सेंटर, केबल लैंडिंग स्टेशन और AI/क्वांटम-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मदद देना। साथ ही, बेंगलुरु के बाहर नए निवेश कॉरिडोर बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। यह पॉलिसी ऐसे समय में आई है जब भारत के डेटा सेंटर सेक्टर में ऊर्जा और पानी के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दक्षता से इंसेंटिव को जोड़कर, कर्नाटक खुद को मुंबई और चेन्नई जैसे हब से अलग दिखाना चाहता है, जहाँ पावर ग्रिड और ग्राउंडवाटर को लेकर चिंताएं हैं।