मैसूर। कर्नाटक का विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। शाही शान-ओ-शौकत, धार्मिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध यह उत्सव 21 अक्टूबर तक चलेगा। इस साल भी मैसूर पैलेस की भव्य सजावट, देवी चामुंडेश्वरी की शोभायात्रा, विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां, ड्रोन शो और पारंपरिक कंबाला प्रतियोगिता उत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे। आयोजकों ने 11 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन के लिए विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है।
मैसूर दशहरा को कर्नाटक के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों में गिना जाता है। इस आयोजन में राजसी परंपराओं के साथ धार्मिक आस्था, लोककलाओं और सांस्कृतिक विविधता का संगम देखने को मिलता है। उत्सव के दौरान शहर के प्रमुख स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे, जबकि मैसूर पैलेस की रोशनी और सजावट लोगों को आकर्षित करेगी। इस बार कई विशेष कार्यक्रम भी रखे गए हैं, जिनसे उत्सव की रौनक और बढ़ने की उम्मीद है।
चामुंडेश्वरी की पूजा के साथ होगी शुरुआत
मैसूर दशहरा का शुभारंभ रविवार को चामुंडी पहाड़ियों पर देवी चामुंडेश्वरी की पूजा-अर्चना के साथ होगा। इस धार्मिक आयोजन के बाद शहर में दशहरा उत्सव की गतिविधियां शुरू होंगी। देवी चामुंडेश्वरी मैसूर की आराध्य देवी मानी जाती हैं और इस पर्व में उनकी विशेष भूमिका रहती है।
दशहरा के दौरान धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। शहर के विभिन्न हिस्सों में उत्सव से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे। राजपरिवार की ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा यह आयोजन मैसूर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
21 अक्टूबर को निकलेगी भव्य जंबू सवारी
मैसूर दशहरा का सबसे प्रमुख आकर्षण 21 अक्टूबर को निकलने वाली जंबू सवारी होगी। इस भव्य शोभायात्रा में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को स्वर्ण हौदे में विराजमान कर निकाला जाता है। शोभायात्रा मैसूर पैलेस से शुरू होकर बन्नीमंटप तक जाएगी।
जंबू सवारी दशहरा उत्सव के समापन का प्रमुख प्रतीक है। इस दौरान सजे हुए हाथियों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मैसूर की शाही परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
मैसूर पैलेस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और देवी चामुंडेश्वरी से जुड़ी आस्था इस शोभायात्रा को विशेष महत्व देती है। इस वर्ष भी जंबू सवारी 21 अक्टूबर को दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी।
मैसूर पैलेस की रोशनी बढ़ाएगी उत्सव की भव्यता
दशहरा के दौरान मैसूर पैलेस को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, महल की रोशनी प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक रहेगी। शहर में उत्सव की रोशनी का उद्घाटन भी रविवार शाम निर्धारित किया गया है।
मैसूर पैलेस दशहरा समारोह की पहचान है। इसकी ऐतिहासिक वास्तुकला, रोशनी और आसपास होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्सव के माहौल को खास बनाते हैं। दशहरा के दिनों में पर्यटक और स्थानीय लोग महल की सजावट देखने पहुंचते हैं।
ड्रोन शो में दिखेगा तकनीक और रोशनी का संगम
इस साल दशहरा उत्सव में ड्रोन शो भी खास आकर्षण होगा। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, बन्नीमंटप के टॉर्चलाइट परेड मैदान में 17, 18, 20 और 21 अक्टूबर को रात 8 बजे ड्रोन शो आयोजित किए जाएंगे।
आसमान में एक साथ उड़ते ड्रोन के जरिए रोशनी और दृश्य प्रस्तुत किए जाएंगे। पारंपरिक दशहरा समारोह में आधुनिक तकनीक का यह समावेश दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव होगा। शो को देखने के लिए सार्वजनिक दर्शक स्थलों की व्यवस्था भी की गई है।
कंबाला प्रतियोगिता भी रहेगी आकर्षण
मैसूर दशहरा के इस साल के कार्यक्रमों में पारंपरिक कंबाला प्रतियोगिता को भी शामिल किया गया है। यह आयोजन 18 और 19 अक्टूबर को वीटीयू कॉलेज के पास बनाए गए कंबाला ट्रैक पर होगा। कार्यक्रम सुबह 9 बजे से शुरू होने के लिए निर्धारित है।
कंबाला कर्नाटक की पारंपरिक भैंसा दौड़ प्रतियोगिता है, जिसे राज्य की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है। दशहरा के दौरान इसका आयोजन उत्सव में लोकपरंपराओं और ग्रामीण संस्कृति का रंग जोड़ेगा।
देशभर की सांस्कृतिक विविधता की झलक
इस बार उत्सव में विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां भी शामिल होंगी। नृत्य, संगीत और लोककलाओं के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे मैसूर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच भी बनेगा।
मैसूर दशहरा के 11 दिनों के कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, कला, भोजन और अन्य गतिविधियों को जगह दी गई है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर होने वाले आयोजन पर्यटकों और स्थानीय लोगों को विविध अनुभव देंगे।
21 अक्टूबर तक उत्सव का माहौल
मैसूर दशहरा 11 से 21 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। इस दौरान शहर में धार्मिक आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पैलेस की रोशनी, ड्रोन शो और कंबाला जैसी गतिविधियां होंगी। उत्सव का समापन 21 अक्टूबर को भव्य जंबू सवारी के साथ होगा।
इस वर्ष की तैयारियों में पारंपरिक शाही वैभव के साथ आधुनिक आकर्षणों को भी शामिल किया गया है। देवी चामुंडेश्वरी की पूजा से शुरू होकर जंबू सवारी तक चलने वाला यह उत्सव मैसूर की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाएगा।
फिलहाल, रविवार से शुरू हो रहे इस उत्सव में मैसूर पैलेस, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर सबकी नजर रहेगी। ड्रोन शो और कंबाला जैसे विशेष आयोजन भी इस साल के दशहरा समारोह को खास बनाएंगे।